पुतिन भारत पहुंचे, आज मोदी से अहम मुलाकात; 7 साल बाद आएंगे शी जिनपिंग

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच गए हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। इसके बाद 12 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी दिल्ली पहुंचेंगे, जिससे BRICS के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ने वाली है।
सुबह 3 बजे दिल्ली पहुंचे पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 की सुबह करीब 3 बजे भारत पहुंचे। नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर भारतीय अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ रूसी राष्ट्रपति की अगवानी के लिए एयरपोर्ट पहुंचे।
भारत यात्रा के दौरान पुतिन BRICS सम्मेलन के प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। हालांकि, उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक मानी जा रही है।
मोदी-पुतिन मुलाकात में रक्षा पर खास नजर
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग को लेकर कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा की संभावना है।

ब्रह्मोस मिसाइल के संभावित अपग्रेड, रूस से S-400 सिस्टम की बाकी डिलीवरी और Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े प्रस्तावों को लेकर बातचीत पर नजर रहेगी। हालांकि, इन मुद्दों पर अंतिम निर्णय या समझौते की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
परमाणु ऊर्जा और व्यापार भी एजेंडे में
रक्षा के अलावा भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग भी बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है। भारत में नए सिविल न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने की योजना और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग पर दोनों नेता चर्चा कर सकते हैं।
व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ तकनीकी सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना BRICS के व्यापक एजेंडे से भी जुड़ा हुआ है।
SCO के बाद फिर आमने-सामने मोदी-पुतिन
मोदी और पुतिन की पिछली मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया था। अब दिल्ली में होने वाली बैठक दोनों देशों के रिश्तों की आगे की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
BRICS बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे पुतिन
पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन के अलावा बिजनेस फोरम से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। वह BRICS बिजनेस फोरम के प्लेनरी सत्र को संबोधित करेंगे।
भारत और रूस के बीच कारोबार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। BRICS सम्मेलन के दौरान पुतिन की कई अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी प्रस्तावित हैं।
7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक व्यस्तता 12 सितंबर को और बढ़ेगी, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली पहुंचेंगे। करीब सात साल बाद होने वाली उनकी भारत यात्रा को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे इस बातचीत में अहम हो सकते हैं।
ईरान के राष्ट्रपति से भी मोदी की बातचीत संभव
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी बातचीत होने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बना सकते हैं।
BRICS में ईरान की सदस्यता के बाद संगठन की भूमिका पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों में भी बढ़ी है। ऐसे में भारत के लिए ईरान के साथ अपने संतुलित और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाना अहम होगा।
BRICS में भारत की कूटनीतिक परीक्षा
एक ही सम्मेलन के दौरान रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की अहम बातचीत भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर पेश करती है। एक तरफ रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाना है, वहीं चीन के साथ सीमा और व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संवाद बनाए रखना है।
ऐसे में BRICS 2026 सिर्फ बहुपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि भारत की संतुलित कूटनीति और बदलते वैश्विक समीकरणों को साधने की क्षमता की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
