Mahatma Gandhi Jayanti : देश के बंटवारे के बाद हरियाणा और राजस्थान के मुसलमान पाकिस्तान जाने के लिये कतई राजी नहीं थे। उस समय हरियाणा के मेवात, गुड़गांव और फरीदाबाद पर अंग्रेज सरकार और राजस्थान के अलवर, भरतपुर पर राजाओं का राज था। जहां इस बटवारे से देश में खून की होली खेली जा रही थी वहीं मेवात भी इससे अछूता नहीं था। इस वजह से राजस्थान के लाखों मुसलमान पाकिस्तान जाने के लिए हरियाणा के मेवात में आये हुए थे। बापू के सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद यहां के मुसलमान रुक गए थे। अगर उस समय नहीं रुकते तो हरियाणा और राजस्थान में एक भी मुसलमान नहीं होता।
मेवात के मुसलमान जब पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहे थे तब महात्मा गांधी 19 दिसंबर 1947 को उस समय गांव घासेडा आए उनके साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता रणबीर सिंह, पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपी चंद भार्गव, कांग्रेस के काफी नेता थे।
उस दौर के लोगों ने गांधी जी का इसे मेवातियों पर बड़ा अहसान बताया, जिन्हें गांधी ने पाकिस्तान में मुहाजिर कहलवाने से बचा लिया था। गांधी के विश्वास के बाद लाखों मेवाती मुसलमान पाकिस्तान जाने से रुक गए थे। गांधी द्वारा देश में मान-सम्मान का भरोसा दिए जाने के वादे के बाद लाखों मुसलमान उजड़ने से ही नहीं बचे बल्कि उन्होंने पाकिस्तान जाने का भी इरादा बदल दिया था।
कैसे आए बापू
मेवातियों के साथ हो रहे अत्याचार और जबरदस्ती पाकिस्तान भेजने के मामले को लेकर स्वतंत्रता सेनानी, अब्दुल हई, राजस्थान के हिम्मत खां, यासीन खां व अन्य मुस्लिम नेता महात्मा गांधी से मिले और उन्हें मेवात आने का न्योता दिया।
क्या कहा महात्मा गांधी ने
महात्मा गांधी ने कहा था कि आज मेरे कहने में वह शक्ति नहीं रही जो पहले हुआ करती थी। अगर मेरे कहने में पहले जैसा प्रभाव होता तो आज देश का एक भी मुसलमान भारतीय संघ को छोड़कर जाने की जरूरत नहीं करता। न ही किसी हिंदु-सिख को पाकिस्तान में अपना घर बार छोड़कर भारतीय संघ में शरण लेने की जरूरत पड़ती।
महात्मा गांधी ने अपने संबोधन में दुख प्रकट करते हुए कहा था कि यहां जो कुछ हो रहा है उसे सुनकर मेरा दिल रंज से भर जाता है। चारों ओर आगजनी, लूटपाट, कत्लेआम, जबरन धर्म परिवर्तन और औरतों का अपहरण, मंदिर-मस्जिद और गुरुद्वारों को तोड़ना एक पागलपन है, इसे रोका नहीं गया तो दोनों जातियों का सर्वनाश हो जाएगा।
इस मौके पर गांधी ने अपने भाषण में मुस्लिम प्रतिनिधियों द्वारा दिये गये शिकायत पत्र की प्रति लाखों लोगों को पढ़कर सुनाई और उन्होंने मेवातियों को विश्वास दिलाया कि उन्हें पूरा मान सम्मान और सुरक्षा दिलाई जाऐगी।
अगर किसी सरकारी अधिकारी ने मेवातियों के साथ कोई अत्याचार किया तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। गांधी ने कहा कि मेरे शब्द आपके दुख में थोड़ा ढांढस बंधा सके तो मुझे खुशी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत में एक समय आएगा जब सारी नफरत जमीन में दफना दी जाएगी और फिर अमन चैन से दोनों समाज रह सकेंगे।
मेवातियों का कहना है कि उस समय मेवात के लोग गांधी को उघाडा (बिना कपड़ों के) नाम से जानते थे। जो भरोसा गांधी ने मेवातियों को दिया उनके वादे को कोई सरकार अभी तक पूरा नहीं कर सकी है। आज भी मेवाती गुर्बत की जिंदगी जी रहे हैं उन्हें रोजगार तो दूर पीने का पानी तक भी नसीब नहीं है।
