खेलराज्य

जींद की बेटी के प्रदर्शन से भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने एशियन गेम्स इतिहास में पहली बार स्वर्ण पदक जीता

कीर्ति शर्मा ने लिख दी एशियाई खेलों में हरियाणा की नई कीर्ति गाथा

Kriti Sharma : कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता। एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। जी हां! जींद जिले के रिटौली गांव की रहने वाली कीर्ति शर्मा पर यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं।

हरियाणा के जींद जिले के एक गांव रिटौली में पली-बढ़ी कीर्ति की पहली प्राथमिकता पढ़ाई थी। जब वह चौथी कक्षा में थी तो उनके पिता ने उनका दाखिला जींद के पास एक निजी स्कूल में करा दिया। आठवीं कक्षा तक, कीर्ति का खेलों से जुड़ाव एकमात्र अनुभव कभी-कभार होने वाली दौड़ प्रतियोगिता ही था। फिर संयोग से, स्कूल ने तीरंदाजी शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने 2019-2020 के आसपास अपने स्कूल के दिनों में तीरंदाजी की शुरुआत की थी। कीर्ति को इस खेल से परिचित कराने में उनके स्कूल ने अहम भूमिका निभाई, क्योंकि स्कूल परिसर में ही तीरंदाजी का मैदान था। शुरुआत में, वह उन सीनियर छात्रों से प्रेरित हुईं जो पहले से ही तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे थे, और उनमें खुद भी इस खेल को अपनाने की गहरी रुचि पैदा हुई।

कीर्ति शर्मा ने बांस से बने भारतीय धनुष से शूटिंग शुरू करने के छह महीने बाद, फाइबरग्लास लिम्ब वाले रिकर्व बो (धनुष) से ​​शूटिंग करने का फ़ैसला किया। इसकी कीमत 60,000 रुपये थी। कीर्ति के पिता, जो एक किसान थे, के लिए यह एक बड़ा खर्च था, लेकिन आख़िरकार वे इसे खरीदने के लिए तैयार हो गए।

उनके पिता विजय शर्मा कहते हैं, “मुझे अंदाज़ा नहीं था कि धनुष इतना महंगा होगा और मेरे पास सिर्फ़ 2 किला (एकड़) ज़मीन है, लेकिन मैं हमेशा से साफ़ था कि बच्चों के भविष्य के लिए मैं कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। मैं पहले से ही उसकी पढ़ाई पर काफ़ी पैसे खर्च कर रहा था, इसलिए जब उसकी आर्चरी पर कुछ खर्च करने की बात आई, तो मैंने मना करने के बारे में कभी नहीं सोचा। मैं आढ़ती (साहूकार) के पास गया और धनुष खरीदने के लिए लोन लिया।” कीर्ति के पिता विजय शर्मा को आज उस लोन का कोई दुख नहीं है।

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने एशियन गेम्स के इतिहास में पहली बार स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया है। फाइनल मुकाबले में भारत की तिकड़ी ने मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत में जींद की बेटी कीर्ति शर्मा के साथ अंकिता भकत और कुमकुम अनिल मोहोद ने अहम भूमिका निभाई। इससे पहले भारत ने सेमीफाइनल में चीन को 5-1 से हराकर पहली बार एशियाई खेलों के फाइनल में जगह बनाई थी।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद कीर्ति ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। आज उनकी मेहनत रंग लाई है और उन्होंने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जींद जिले को गौरवान्वित किया है। कीर्ति शर्मा की यह उपलब्धि उन तमाम खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। एक किसान की बेटी का एशियन गेम्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। जींद की बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है। कीर्ति शर्मा ने अपनी सफलता से हरियाणा की खेल प्रतिभा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

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