
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले बीजेपी ने अपनी रणनीति को बूथ स्तर तक उतार दिया है। पार्टी ने उन करीब 18,900 बूथों की पहचान की है, जहां 2022 में जीत मिली थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में समीकरण पलट गए। अब इन्हीं बूथों से वापसी की तैयारी है।
2027 से पहले BJP ने शुरू किया बूथ मिशन
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी का लक्ष्य लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के साथ 2022 के मुकाबले अपना प्रदर्शन बेहतर करना है। इसके लिए बीजेपी ने सबसे पहले बूथ स्तर पर अपनी कमजोर कड़ियों को पहचानने की रणनीति बनाई है।
पार्टी का खास फोकस उन बूथों पर है, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार आगे रहे थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को वहां हार मिली।
करीब 18,900 बूथों पर विशेष नजर
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 18,900 ऐसे बूथ हैं, जहां पार्टी ने 2022 में जीत दर्ज की थी, लेकिन दो साल बाद लोकसभा चुनाव में इन बूथों पर उसे नुकसान उठाना पड़ा।

अब पार्टी डेटा के आधार पर इन बूथों का अलग-अलग अध्ययन कर रही है। स्थानीय समीकरण, संगठन की सक्रियता, मतदाताओं की नाराजगी और चुनावी प्रबंधन जैसी वजहों को समझने की कोशिश होगी।
ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान
दोनों चुनावों के आंकड़ों की तुलना में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण इलाकों से सामने आई है। 2024 में जिन बूथों पर पार्टी को नुकसान हुआ, उनमें करीब 80 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में बताए जा रहे हैं।
अवध और पूर्वांचल में बीजेपी को बूथ स्तर पर सबसे ज्यादा झटका लगा। 2022 में अवध की 154 विधानसभा सीटों में बीजेपी ने 101 सीटें जीती थीं, लेकिन 2024 में अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे इलाकों में पार्टी के प्रदर्शन में बड़ी गिरावट दिखी।
पूर्वांचल ने भी बढ़ाई BJP की चिंता
पूर्वांचल में भी तस्वीर बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण रही। 2022 में पार्टी ने यहां 102 विधानसभा सीटों में से 53 पर जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और प्रयागराज ग्रामीण जैसे क्षेत्रों में बूथ स्तर पर उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा।
इसके मुकाबले पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। 2022 में बीजेपी ने यहां 128 में से 87 विधानसभा सीटें जीती थीं, जबकि 2024 के लोकसभा वोटों के हिसाब से वह करीब 65 सीटों पर ही आगे रही।
B.L. संतोष और विनोद तावड़े संभालेंगे मोर्चा
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी.एल. संतोष 11 सितंबर से तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर रहेंगे। इस दौरान लखनऊ और कानपुर क्षेत्रों के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर बूथ संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा होगी।
वहीं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े भी 16 से 22 सितंबर के बीच तीन क्षेत्रों के 10 जिलों का दौरा करेंगे। इन दौरों में कमजोर बूथों की समीक्षा और संगठनात्मक कमियों को दूर करने पर जोर रहेगा।
2024 का झटका, 2027 में वापसी की तैयारी
2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी उत्तर प्रदेश में 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2019 में उसे 62 सीटें मिली थीं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर बड़ा उलटफेर किया।
अब विधानसभा चुनाव में करीब छह महीने का समय बचा है। बीजेपी की कोशिश है कि 2024 के नुकसान से सबक लेते हुए करीब 19 हजार कमजोर बूथों पर पहले से काम किया जाए। सवाल यही है कि क्या बूथ स्तर पर शुरू किया गया यह अभियान 2027 में बीजेपी के लिए खोई जमीन वापस लाने में कामयाब होगा?
