
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में दशकों से चले आ रहे राजनीतिक और सामाजिक सवालों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बैठक ने नई उम्मीदें जगा दी हैं। गोरखालैंड की मांग से लेकर विकास और प्रशासनिक अधिकारों तक, अब समाधान की दिशा में नई पहल शुरू होने के संकेत हैं।
सुकना में पहाड़ी नेताओं के साथ अहम बैठक
उत्तर बंगाल के दौरे के तीसरे और अंतिम दिन शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दार्जिलिंग की तलहटी में स्थित सुकना के एक होटल में पहाड़ी नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी समेत पहाड़ी इलाकों के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। अधिकारियों के मुताबिक, संवैधानिक ढांचे के भीतर दार्जिलिंग पहाड़ियों की समस्याओं का स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशना बैठक का प्रमुख मुद्दा रहा।
गोरखालैंड की मांग फिर चर्चा में
दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कई दशकों से चली आ रही है। गोरखा समुदाय और क्षेत्र के अन्य निवासी राजनीतिक पहचान, प्रशासनिक अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
पिछली सरकारों ने दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन जैसे मॉडल के जरिए समाधान की कोशिश की थी। हालांकि, इन व्यवस्थाओं से क्षेत्र में लंबे समय तक राजनीतिक स्थिरता कायम नहीं हो सकी।

नेताओं ने साधी चुप्पी
बैठक के बाद गोरखालैंड को लेकर नेताओं की ओर से कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अन्य नेताओं ने भी अलग राज्य की मांग पर खुलकर कुछ नहीं कहा।
ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार गोरखालैंड की मांग को किस रूप में आगे बढ़ाएगी। हालांकि, संवैधानिक दायरे में समाधान तलाशने की बात ने चर्चा जरूर तेज कर दी है।
पुरानी समस्याओं के लिए बनेगी विशेष कमेटी
बैठक के बाद दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा ने बताया कि पहाड़ी इलाकों की पुरानी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी। पंकज कुमार सिंह को इसके लिए मध्यस्थ की जिम्मेदारी दी गई है।
कमेटी में पहाड़ी क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों और संगठनों की मांगों को समझकर केंद्र सरकार के सामने रखना होगा।
संवैधानिक रास्ते से समाधान की कोशिश
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता रोशन गिरी ने भी कमेटी के गठन की पुष्टि करते हुए कहा कि पहाड़ी इलाकों की मांगों को केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाधान संवैधानिक नियमों के तहत तलाशा जाएगा।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दार्जिलिंग का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक मांग तक सीमित नहीं है। इसमें रोजगार, विकास, प्रशासन, पहचान और क्षेत्रीय अधिकार जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं।
अब कमेटी की भूमिका पर नजर
अमित शाह की बैठक के बाद दार्जिलिंग की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कमेटी पुराने विवादों को किस तरह सुलझाती है और क्या सभी पक्षों को साथ लेकर कोई स्वीकार्य रास्ता निकाला जा सकेगा।
दशकों से चले आ रहे पहाड़ी असंतोष के बीच असली परीक्षा अब घोषणाओं की नहीं, बल्कि ऐसे समाधान की होगी जो संविधान के दायरे में रहते हुए क्षेत्र को स्थायी राजनीतिक स्थिरता और विकास दे सके।
