
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोशल मीडिया पर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा ब्रजेश पाठक के बीच बयानबाजी लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक पोस्ट में केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत की गई। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने एक वीडियो रील पोस्ट करते हुए तंज कसा कि “दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती”।
केशव प्रसाद मौर्य का तीखा पलटवार
अखिलेश यादव के इस पोस्ट के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी और ब्रजेश पाठक की जोड़ी से अखिलेश यादव का घबराना स्वाभाविक है। मौर्य ने दावा किया कि यह जोड़ी जनता के विश्वास की पहचान बन चुकी है और उत्तर प्रदेश में विकास और सुशासन का प्रतीक है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीति अब जनता के बीच प्रभाव खो चुकी है और वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह गए हैं।

ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ जोड़कर मौर्य का जवाब
केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ भी जोड़े। उन्होंने खुद को चंद्रगुप्त मौर्य के वंश से प्रेरित बताते हुए कहा कि वह अखंड भारत और विकासशील उत्तर प्रदेश के निर्माण के लिए संकल्पित हैं। साथ ही उन्होंने भगवान बुद्ध के शांति और समानता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान वंचित वर्गों के साथ अन्याय हुआ, जिसे जनता भूली नहीं है।
ब्रजेश पाठक का जवाब और 2027 चुनाव का दावा
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह “नई उत्तर प्रदेश सरकार की सुपर जोड़ी” है, जो जनता के भरोसे पर खरा उतर रही है। पाठक ने दावा किया कि भाजपा सरकार विकास और जनसेवा के एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि विपक्ष केवल बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब समझती है और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी। पाठक ने 2027 में भाजपा की सरकार बनने का भी दावा किया और कहा कि सरकार “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
