
मुरादाबाद की बिलारी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक मोहम्मद फहीम इरफान रविवार को कांवड़ियों का स्वागत करने पहुंचे थे। ये कांवड़िए हरिद्वार से बरेली की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर एक ऐसे सपा समर्थक कांवड़िये पर पड़ी, जिसकी कांवड़ पर पार्टी का झंडा और सपा के प्रमुख नेताओं की तस्वीरें लगी थीं।
कांवड़ पर मुलायम, अखिलेश और डिंपल की तस्वीर
सपा समर्थक कांवड़िये ने कांवड़ पर पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की तस्वीरें लगा रखी थीं। कांवड़िये ने बताया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सरकार बनने की मन्नत लेकर हरिद्वार से जल लेकर निकला है।
विधायक ने कांवड़िये के इस समर्पण की तारीफ करते हुए उसका स्वागत किया और पार्टी के प्रति उसकी निष्ठा का जिक्र किया।
डिंपल यादव को लेकर कही बड़ी बात
कांवड़ पर लगी तस्वीरों का जिक्र करते हुए मोहम्मद फहीम इरफान ने डिंपल यादव को लेकर कहा कि वह इस समय ‘पूरे देश की मां’ हैं और ममता का प्रतीक हैं। उन्होंने इसके साथ अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव की तस्वीरों का भी उल्लेख किया।

विधायक ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया और अखिलेश यादव के प्रति कांवड़िये की आस्था और प्रेम की बात कही।
31 लीटर से ज्यादा गंगाजल लेकर चल रहा था कांवड़िया
सपा विधायक के मुताबिक कांवड़िया करीब साढ़े 31 लीटर गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रहा था। उन्होंने कहा कि उसने 2027 में सपा की जीत के लिए मन्नत मांगी है। कांवड़िये के हाथ पर अखिलेश यादव की तस्वीर वाला टैटू भी बना हुआ था, जिसका विधायक ने विशेष रूप से उल्लेख किया।
राजनीतिक संदेश भी नजर आया
कांवड़ यात्रा धार्मिक आस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। ऐसे में एक राजनीतिक दल के समर्थक द्वारा पार्टी नेताओं की तस्वीरों के साथ कांवड़ यात्रा करना और 2027 के चुनाव को लेकर मन्नत मांगना चर्चा का विषय बन गया है। विधायक का बयान सामने आने के बाद इसमें राजनीतिक संदेश भी देखा जा रहा है।
हालांकि, विधायक ने अपने बयान में मुख्य रूप से कांवड़िये की आस्था, पार्टी के प्रति उसके समर्पण और स्वागत की बात पर जोर दिया।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
डिंपल यादव को ‘पूरे देश की मां’ बताने वाला यह बयान अब राजनीतिक चर्चा में है। सोशल मीडिया पर लोग विधायक की टिप्पणी को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। एक तरफ इसे समर्थक की भावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक भाषा और धार्मिक यात्रा के दौरान पार्टी के प्रचार को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
