सत्य निकेतन PG हादसे में सात मौतों के बाद CJP की सात मांगों ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए

दिल्ली के सत्य निकेतन में PG भवन गिरने से सात लोगों की मौत के बाद सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में है। छात्रों के आवास, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल तेज हैं। इसी बीच CJP ने जवाबदेही, जांच, मुआवजे और सुरक्षित छात्र आवास समेत सात मांगें सामने रखी हैं।
सात मौतों के बाद उठे बड़े सवाल
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला PG भवन का गिरना सिर्फ एक इमारत के ढहने की घटना नहीं है। इस हादसे ने राजधानी में छात्रों के लिए उपलब्ध निजी आवासों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए। मृतकों में ज्यादातर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं।
PG मालिक समेत तीन गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने PG मालिक, उसकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बावजूद सवाल यह है कि क्या केवल भवन मालिक की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त होगा? किसी छात्र के लिए PG सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि उसका रोजमर्रा का सुरक्षित ठिकाना होता है। ऐसे में भवन की मंजूरी और सुरक्षा जांच की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

CJP ने रखीं सात मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने सात मांगें सामने रखी हैं। इनमें PG मालिक के खिलाफ कार्रवाई के साथ कथित PG माफिया नेटवर्क की स्वतंत्र आपराधिक जांच, छात्र आवासों का इंजीनियरिंग-ग्रेड स्ट्रक्चरल ऑडिट और अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई शामिल है।
CJP ने स्वीकृत PG और उनकी सुरक्षा स्थिति की जानकारी वाला सार्वजनिक डेटाबेस बनाने की मांग भी की है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य छात्रों के लिए स्वायत्त सरकारी हॉस्टल और मृतकों के परिवारों को ₹1 करोड़ तक तथा घायलों को ₹20 लाख तक मुआवजा देने की मांग की गई है।
13 जिला समितियों पर भी सवाल
CJP ने 3 जून 2026 के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद बनाई गई 13 जिला समितियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि समितियों का काम कुछ समय बाद धीमा या निष्क्रिय हो गया। उसने सत्य निकेतन सर्वेक्षण और प्रवर्तन रिपोर्ट भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
हाई कोर्ट ने MCD को दिया निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की उच्च स्तरीय जांच का निर्देश MCD को दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि ऐसी दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक तक सीमित नहीं हो सकती। विश्वविद्यालय अधिकारियों और MCD की भूमिका तथा संभावित प्रशासनिक चूक की भी जांच जरूरी है।
अब जवाबदेही तय होना जरूरी
सत्य निकेतन हादसा एक चेतावनी है कि शहरों में बढ़ते छात्र आवासों के साथ सुरक्षा मानकों की निगरानी भी मजबूत होनी चाहिए। एक इमारत का नक्शा, उसकी संरचनात्मक मजबूती और सरकारी अनुमति कागजों की औपचारिकता नहीं, बल्कि उसमें रहने वाली जिंदगियों की सुरक्षा है। सात मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अगली त्रासदी रोकने के लिए व्यवस्था इस बार सचमुच बदलेगी?
