
सागर के बंडा-शाहगढ़ इलाके में संदिग्ध अवैध शराब से मौतों ने कई गांवों को शोक में डुबो दिया है। अस्पतालों में भर्ती लोगों की चिंता के बीच सरकार ने जांच तेज की, जबकि कांग्रेस ने प्रशासनिक जवाबदेही और आबकारी व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
मौतों के बाद गांवों में पसरा मातम
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन से हुई मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि अपुष्ट जानकारी इससे अधिक मौतों का दावा कर रही है। करीब 100 शराब पीड़ित सागर और बंडा के अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं।
प्रभावित गांवों में पहुंचे राजेंद्र शुक्ल
सोमवार को उपमुख्यमंत्री और सागर जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ल प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने बमूरा भेड़ा, नौराज, गूगरा खुर्द, धुरमार, चौका, हनौती और पापेट समेत कई इलाकों में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की।
शुक्ल ने परिवारों को भरोसा दिलाया कि सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने अवैध शराब के निर्माण और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके मुताबिक 10 से अधिक संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।

मजिस्ट्रियल जांच से खुलेगा राज
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जैसीनगर के एसडीएम को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच में मौतों के वास्तविक कारण, शराब के स्रोत और उसके निर्माण, भंडारण व वितरण की पड़ताल होगी।
इसके साथ ही संबंधित विभागों की भूमिका और संभावित प्रशासनिक लापरवाही भी जांच के दायरे में रहेगी। पुलिस ने दो मामलों में 30 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
जीतू पटवारी का सरकार पर हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों से मुलाकात के बाद सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की।
पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
अब असली सवाल जवाबदेही का
यह मामला सिर्फ अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं है। यदि जांच में जहरीली या अमानक शराब की पुष्टि होती है, तो उसके पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क के साथ निगरानी व्यवस्था की भूमिका भी सामने आनी चाहिए। आखिर ऐसी शराब गांवों तक कैसे पहुंची?
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें
बंडा-शाहगढ़ की त्रासदी ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं। अब प्रशासनिक जांच और पुलिस कार्रवाई से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मौतों की असली वजह क्या थी और जिम्मेदार कौन है। किसी भी जांच की सबसे बड़ी सफलता तभी होगी, जब दोषियों पर कार्रवाई के साथ ऐसी त्रासदी दोबारा न होने की ठोस व्यवस्था बने।
