चोरी हुई बाइक 80 लीटर शराब के साथ जब्त, अब मालिक को मिला उत्पाद विभाग का नोटिस

बिहार के भोजपुर जिले में बाइक चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने वाहन मालिक की परेशानी और बढ़ा दी। जिस बाइक की चोरी की प्राथमिकी पहले ही दर्ज हो चुकी थी, वही कुछ दिनों बाद 80 लीटर चुलाई शराब के साथ पकड़ी गई और अब मालिक से जवाब मांगा गया है।
28 जुलाई की रात चोरी हुई बाइक
बिहिया थाना क्षेत्र के महुआंव गांव निवासी मिथिलेश कुमार ने अपनी हीरो स्प्लेंडर प्लस बाइक 28 जुलाई की रात घर के दरवाजे पर खड़ी की थी। रात करीब 11 बजे वह बाइक खड़ी कर सोने चले गए।
सुबह करीब चार बजे उठने पर बाइक गायब मिली। काफी तलाश के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने बिहिया थाने में बाइक चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई।

19 अगस्त को शराब के साथ मिली बाइक
चोरी के करीब तीन सप्ताह बाद इसी बाइक का इस्तेमाल कथित अवैध शराब कारोबार में किए जाने की जानकारी सामने आई। उत्पाद विभाग की टीम ने 19 अगस्त को बाइक को 80 लीटर चुलाई शराब के साथ जब्त किया।
कार्रवाई के दौरान दो बाइक के साथ दो युवकों को भी गिरफ्तार किया गया। इस मामले में उत्पाद विभाग थाना सदर कांड संख्या 175/26 दर्ज होने का उल्लेख नोटिस में किया गया है।
अब बाइक मालिक को मिला नोटिस
बाइक जब्त होने के बाद उत्पाद विभाग ने उसके मालिक मिथिलेश कुमार को नोटिस भेजा है। विभाग ने उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष और सफाई प्रस्तुत करने को कहा है।
मालिक का कहना है कि बाइक चोरी होने की घटना की प्राथमिकी पहले ही पुलिस थाने में दर्ज कराई जा चुकी थी। चोरी के बाद बाइक किसके हाथ लगी और उसका इस्तेमाल शराब ढोने में कैसे हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
मालिक के सामने खड़ा हुआ बड़ा सवाल
मिथिलेश कुमार अब उत्पाद विभाग के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाइक चोरी होने के बाद वह उसके इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकते।
अब जांच का अहम सवाल यही है कि घर से चोरी हुई बाइक शराब कारोबारियों तक कैसे पहुंची। क्या बाइक चोरी करने वाले लोग ही इसे अवैध कारोबार में इस्तेमाल कर रहे थे या इसे आगे किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया गया?
पुलिस और उत्पाद विभाग की जांच अहम
इस पूरे मामले में बाइक चोरी की प्राथमिकी और बाद में शराब के साथ बाइक बरामद होने की घटनाओं को जोड़कर जांच करना जरूरी होगा। वाहन के इस्तेमाल से जुड़े लोगों की पहचान, बाइक की बरामदगी की परिस्थितियां और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ अहम सुराग दे सकती है।
साथ ही, चोरी की बाइक का इस्तेमाल होने की स्थिति में वास्तविक वाहन मालिक की भूमिका को दस्तावेजों और FIR के आधार पर स्पष्ट करना भी जरूरी है।
एक बाइक ने खोल दिए कई सवाल
मिथिलेश के लिए मामला सिर्फ चोरी हुई बाइक का नहीं रहा। उनकी बाइक एक आपराधिक मामले में बरामद होने के बाद अब उन्हें विभाग के सामने अपनी सफाई देनी पड़ रही है।
हालांकि, अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—चोरी हुई बाइक शराब तस्करों तक पहुंची कैसे? इसका जवाब पुलिस और उत्पाद विभाग की जांच से ही सामने आएगा।
