हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन, खाली पद भरने और मांगें पूरी करने की उठाई आवाज

हरियाणा रोडवेज में कर्मचारियों की कमी और लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सोनीपत डिपो में कर्मचारियों ने दो घंटे प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि मांगों पर बातचीत नहीं हुई तो सितंबर में पूरे प्रदेश की बसें थम सकती हैं।
दो घंटे तक कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को सोनीपत डिपो में कर्मचारियों ने सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन का संचालन अनिल आंतिल ने किया। बाद में कर्मचारियों ने महाप्रबंधक के माध्यम से परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई को परिवहन मंत्री के आवास के घेराव के दौरान मंत्री ने 15 दिनों के भीतर बातचीत के लिए बुलाने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था।
कर्मचारियों के मुताबिक निर्धारित समय गुजरने के बावजूद बैठक को लेकर कोई पत्र जारी नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।

खाली पद भरने की प्रमुख मांग
रोडवेज कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग चालक, परिचालक, हेल्पर और मैकेनिक के सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की कमी का असर कामकाज और सेवाओं पर भी पड़ता है।
इसके अलावा परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाने और लिपिकों की तर्ज पर तीन वेतन वृद्धि देने की मांग भी रखी गई है।
जोखिम भत्ता और पदोन्नति की मांग
कर्मचारियों ने जोखिम वाली ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने की मांग की। चालकों का पे-ग्रेड बढ़ाकर स्टैंड इंचार्ज का पद सृजित करने और पदोन्नति देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
कर्मचारियों ने वर्ष 2016 में भर्ती चालकों और HKRN कर्मियों को पक्का करने की मांग भी उठाई।
इलेक्ट्रिक बसों की ठेका प्रथा का विरोध
कर्मशाला कर्मचारियों ने तकनीकी पदों पर पदोन्नति की मांग की है। वहीं वर्ष 2018 के कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर प्रमोशन देने की मांग भी सामने आई।
यूनियन ने इलेक्ट्रिक बसों की ठेका प्रथा बंद करने और अर्जित अवकाश यानी EL बहाल करने की मांग भी रखी। कर्मचारियों का दावा है कि मौजूदा व्यवस्था से रोडवेज को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
सितंबर में चक्का जाम की चेतावनी
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारी जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के रवैये के कारण अब आंदोलन तेज करना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 5 और 6 सितंबर को पूरे हरियाणा में बसों का पूर्ण चक्का जाम रहेगा।
अब सरकार और रोडवेज कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन आगे बढ़ता है, इस पर यात्रियों की भी नजर रहेगी। कर्मचारियों की मांगों का समाधान बातचीत से निकलना ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए सबसे बेहतर रास्ता होगा।
