
झारखंड में छात्र आंदोलन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की टिप्पणी के बाद बिहार कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर मुख्यमंत्री छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें बिहार में हुए छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई पर भी अपनी चिंता जाहिर करनी चाहिए।
सम्राट चौधरी के बयान से शुरू हुआ विवाद
सम्राट चौधरी ने झारखंड में नौकरी में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर कथित बर्बरतापूर्ण कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि छात्र हित की राजनीति क्या राजनीतिक सुविधा के हिसाब से तय की जाती है।
कांग्रेस ने बिहार के मुद्दे गिनाए
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने मंगलवार को पलटवार करते हुए कहा कि अगर सम्राट चौधरी छात्रों को लेकर वास्तव में चिंतित हैं तो उन्हें बिहार के छात्र आंदोलनों पर भी बोलना चाहिए।
उन्होंने सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 से गोली चलाए जाने, दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल और बिहार में शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज जैसे मामलों का जिक्र किया।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं पर मुख्यमंत्री की ओर से वैसी चिंता दिखाई नहीं गई, जैसी वह झारखंड के मामले में जता रहे हैं।

‘PHD अभ्यर्थी आठ दिनों से आमरण अनशन पर’
स्नेहाशीष वर्धन ने बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 के खिलाफ चल रहे आंदोलन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सचिवालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर PHD अभ्यर्थी आठ दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि या मंत्री प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा है। उन्होंने सरकार से छात्रों की समस्याओं को सुनने और सार्थक बातचीत करने की मांग की।
झारखंड में कांग्रेस के समर्थन का दावा
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि झारखंड में पार्टी छात्रों के समर्थन में खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की सरकार छात्रों के साथ सार्थक बातचीत कर रही है और गठबंधन में होने के बावजूद पार्टी छात्रों के हितों को लेकर अपनी बात रख रही है।
उनका कहना था कि आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति सहानुभूति रखना और उनकी समस्याओं को सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
बिहार बनाम झारखंड की राजनीति तेज
सम्राट चौधरी के बयान के बाद कांग्रेस का पलटवार ऐसे समय आया है जब छात्र आंदोलनों और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने राज्यों में छात्रों के हित और सरकार की कार्रवाई को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।
अब राजनीतिक बहस इस सवाल पर केंद्रित हो गई है कि छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक दलों का रुख क्या समान है या फिर राज्य और राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार बदलता है।
बयानबाजी से आगे बढ़ेगा मुद्दा?
फिलहाल कांग्रेस के आरोपों और सम्राट चौधरी के बयान के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
छात्रों से जुड़े मुद्दे चाहे बिहार के हों या झारखंड के, इस पूरे विवाद ने एक अहम सवाल जरूर सामने रखा है—क्या छात्र आंदोलनों पर सरकारों और राजनीतिक दलों का रवैया राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर समान होना चाहिए?
