
Politics of Ahirwal : प्रदेश के अहीरवाल की भाजपा की राजनीति पिछले कुछ दिनों से लगातार गर्मा रही है। राव नरबीर सिंह और राव इंद्रजीत सिंह के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता सड़क पर आ गई है बावजूद इसके की दोनों वर्तमान में एक ही दल में काम कर रहे हैं। दोनों नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने और पछाड़ने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते।
राव इंद्रजीत सिंह की बेटी और प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री राव आरती सिंह ने इस अहीरवाल की राजनीति में राव नरबीर सिंह के पैतृक गांव बूढ़पुर में दस्तक दी है। राव नरबीर सिंह के पैतृक गांव में ‘भावी मुख्यमंत्री आरती राव’ के नारे लगाए गए। भावी मुख्यमंत्री के नारों पर आरती राव ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर अभी शुरू हुआ है और वह खुद भी चीजें सीख रही हैं। वह राजनीति में लंबी पारी के लिए आई हैं। पार्टी भविष्य में कोई जिम्मेदारी देती है तो उसे पूरी मेहनत से निभाएंगी।
राजनीति में किस्मत का ज्यादा योगदान
आरती राव ने कहा कि राजनीति में सफलता मेहनत के साथ-साथ किस्मत से मिलती है। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में विधानसभा चुनाव का टिकट मांगा था, लेकिन नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा के लिए काम किया और पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट मांगे। राजनीति में समय और किस्मत का भी महत्व है। बाद में उन्हें टिकट मिला, वह विधायक बनीं और अब मंत्री के तौर पर काम कर रही हैं। रेवाड़ी से भविष्य की राजनीति को लेकर आरती राव ने कहा कि यह वक्त बताएगा। फिलहाल वह अटेली की विधायक हैं और मंत्री के तौर पर पूरे प्रदेश के लोगों की सेवा कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें जितना काम किया जाए, उतना कम है। लोगों की सेवा करना पुण्य का काम है।

प्रदेश के अहीरवाल में राव नरबीर सिंह और राव इंद्रजीत सिंह दोनों के परिवार लंबे समय से सक्रिय हैं। राव इंद्रजीत के पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे। उनकी गिनती इंदिरा गांधी के करीबियों में होती थी। उन्होंने अपनी हरियाणा विशाल पार्टी का कांग्रेस में विलय किया था। राव इंद्रजीत उन्हीं की सियासी लीगेसी को बढ़ा रहे हैं। राव इंद्रजीत 6 बार के सांसद हैं। अब राव इंद्रजीत सिंह ने अपनी बेटी राव आरती सिंह को अपनी राजनीतिक विरासत सौंप दी है।
दूसरी तरफ राव नरबीर के दादा राव मोहर सिंह आजादी से पहले MLC रहे हैं। उनके पिता महाबीर सिंह मंत्री रहे। राव नरबीर खुद 4 बार विधायक बने हैं और चारों बार मंत्री बने। वह जाटूसाना, सोहना और बादशाहपुर से विधायक बने हैं।
राव नरबीर और राव इंद्रजीत दोनों भाजपा में हैं, लेकिन दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पुरानी है। 1987 में देवीलाल की पार्टी से जाटूसाना विधानसभा सीट पर राव नरबीर ने राव इंद्रजीत को हराकर चुनाव जीता था।
