
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के SNCU में शनिवार दोपहर क्रैडल वार्मर में अचानक स्पार्किंग से आग भड़क उठी। ऑक्सीजन की मौजूदगी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। एक ही वार्मर पर मौजूद तीन नवजात इसकी चपेट में आकर झुलस गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है।
वार्मर में स्पार्किंग से अचानक लगी आग
छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी SNCU में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक क्रैडल वार्मर में अचानक स्पार्किंग हुई। दोपहर करीब पौने दो बजे हुई इस घटना के बाद वार्ड में मौजूद स्टाफ तुरंत हरकत में आया।
वार्मर के पास ऑक्सीजन सप्लाई होने के कारण आग तेजी से फैल गई और उसकी चपेट में तीन नवजात बच्चे आ गए।
तीन मासूम झुलसे, एक की हालत गंभीर
घटना के दौरान एक ही वार्मर पर मौजूद तीन बच्चे झुलस गए। अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. कंचन दुबे के मुताबिक, स्टाफ ने तत्काल फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझाई और बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया।
फिलहाल तीनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। इनमें से एक बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों के मुताबिक उसे सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
समय रहते बुझाई आग, टला बड़ा हादसा
SNCU में बड़ी संख्या में नवजात बच्चों के भर्ती होने की बात सामने आई है। ऐसे में आग कुछ देर और फैलती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

अस्पताल स्टाफ की त्वरित कार्रवाई से आग पर जल्द काबू पा लिया गया। हालांकि, इस घटना ने नवजातों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा और नियमित जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्मर की तकनीकी खराबी पर जांच
अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, क्रैडल वार्मर की हीटिंग यूनिट में तकनीकी खराबी और फिलामेंट में स्पार्किंग को आग की संभावित वजह माना जा रहा है।
अब जांच का अहम सवाल यह है कि उपकरण में खराबी कैसे आई और क्या वार्मर की नियमित तकनीकी जांच की गई थी। अस्पताल प्रबंधन इन सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहा है।
मशीनों की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। खासकर SNCU जैसे संवेदनशील वार्ड में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की समय-समय पर जांच और मेंटेनेंस कितना प्रभावी है, इस पर सवाल उठने लगे हैं।
नवजातों के इलाज में छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है। इसलिए जांच में सिर्फ आग लगने की वजह ही नहीं, बल्कि उपकरण के रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी समीक्षा जरूरी होगी।
जांच रिपोर्ट से साफ होगी असली वजह
फिलहाल तीनों बच्चों का इलाज जबलपुर में चल रहा है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अस्पताल प्रबंधन की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि वार्मर में तकनीकी खराबी कब से थी और उसकी पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी।
एक हादसा टल गया, लेकिन तीन मासूमों के झुलसने की घटना ने अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
