
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार, 17 अगस्त को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। उनके मुताबिक अलग-अलग राज्यों में एक साथ ऑपरेशन कर 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया। सरकार ने इसे आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया है।
हथियार और निगरानी उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कथित तौर पर IED, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड मिले। अमित शाह के अनुसार कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग भी थी। इसके अलावा जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरों की बरामदगी का भी दावा किया गया है।
यूपी, हरियाणा और दिल्ली में सबसे ज्यादा गिरफ्तारी
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों की गिरफ्तारी बताई गई है। इसके बाद राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8 और उत्तराखंड में 5 गिरफ्तारियां हुईं। अन्य राज्यों में भी कार्रवाई की गई। अलग-अलग रिपोर्टों में कुल संख्या 253 के आसपास बताई गई है।
रियल टाइम इंटेलिजेंस से ऑपरेशन
सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य पुलिस के साथ खुफिया सूचनाओं के आधार पर समन्वित कार्रवाई की। इससे संकेत मिलता है कि अभियान केवल एक स्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि नेटवर्क से जुड़े संभावित संपर्कों और ठिकानों को एक साथ निशाना बनाया गया। इससे पहले भी NIA शहजाद भट्टी से जुड़े मामलों में पंजाब और हरियाणा में कार्रवाई कर चुकी है।

सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम?
स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील मौके से पहले किसी कथित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ इतनी व्यापक कार्रवाई सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच का अगला चरण गिरफ्तार लोगों के संपर्क, फंडिंग, डिजिटल गतिविधियों और संभावित साजिशों की कड़ियां जोड़ने पर केंद्रित हो सकता है।
आगे जांच से खुलेंगे बड़े राज
अमित शाह ने कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति की बड़ी सफलता बताया है। हालांकि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और बरामदगी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल इस ऑपरेशन ने देशभर में फैले कथित नेटवर्क की तस्वीर को जांच एजेंसियों के लिए और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच से यह पता चलेगा कि इसके पीछे कितनी बड़ी साजिश और कितने स्थानीय संपर्क सक्रिय थे।
अंतिम बात: आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कार्रवाई की असली सफलता केवल गिरफ्तारियों की संख्या में नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क, उसकी फंडिंग और उसके संपर्कों को कानून के दायरे में लाने में होती है। अब निगाहें जांच के अगले चरण पर हैं।
