
पंजाब के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को सोमवार को बड़ा झटका लगा, जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ अफसर (CHO) अपनी लंबित मांगों को लेकर सामूहिक हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के चलते ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं बंद कर दी गईं, जिससे कई स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्रों पर कामकाज प्रभावित हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी
हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने “सरकार मुर्दाबाद” और “स्वास्थ्य कर्मियों को पक्का करो” जैसे नारों के माध्यम से अपना विरोध जताया। कम्युनिटी हेल्थ अफसर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में ईमानदारी और समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
महामारी में सेवाएं देने का दिया हवाला
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि कोविड महामारी और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में उन्होंने बिना किसी भय के लगातार सेवाएं दीं। इसके बावजूद न तो उन्हें उचित वेतन मिला और न ही नौकरी की स्थिरता। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय कार्यभार लगातार बढ़ा रही है, जिससे मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

प्रमुख मांगों को लेकर बढ़ा आंदोलन
कम्युनिटी हेल्थ अफसरों की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, वेतन वृद्धि, अन्य राज्यों के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान, नए इंसेंटिव प्रपत्र की वापसी, कैडर स्वीकृति, नियमितीकरण, लॉयल्टी बोनस जारी करना और इंसेंटिव राशि को मूल वेतन में शामिल करना शामिल है। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नए इंसेंटिव फॉर्म को “तानाशाही फैसला” बताते हुए उसकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।
एक जुलाई तक हड़ताल, फिर राज्य स्तरीय प्रदर्शन
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि हड़ताल एक जुलाई तक जारी रहेगी। इसके बाद दो जुलाई को मुख्यमंत्री के आवासीय क्षेत्र के निकट राज्य स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि आंदोलन के कारण यदि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और सरकार की होगी।
