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हरिसेवा आश्रम में सीएम धामी का संबोधन, सनातन संस्कृति और अर्धकुंभ पर बड़ा संदेश

हरिद्वार के हरिपुरकलां स्थित हरिसेवा आश्रम में आयोजित वार्षिकोत्सव एवं श्रीमद्भागवत कथा के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की आध्यात्मिक चेतना, संस्कृति और जीवन-दर्शन की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। उन्होंने कहा कि संत समाज सदियों से राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य करता आया है और उनके आशीर्वाद से ही सनातन संस्कृति का परचम विश्वभर में लहरा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संतों की उपस्थिति में बोलना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है और उनके आशीर्वाद का महत्व सबसे अधिक है।

सनातन धर्म का स्वर्णिम काल चल रहा है

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को आज दुनिया के लगभग 190 देशों ने अपनाया है, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने योगगुरु बाबा रामदेव के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि योग को वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय सनातन धर्म का स्वर्णिम काल है और भारत की आध्यात्मिक विरासत दुनिया को नई दिशा देने का काम कर रही है।

हरिसेवा आश्रम में सीएम धामी का संबोधन, सनातन संस्कृति और अर्धकुंभ पर बड़ा संदेश

राम मंदिर, काशी कॉरिडोर और महाकाल लोक बने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक

सीएम धामी ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और उज्जैन का महाकाल लोक भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहचान हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में भी चारधाम यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया गया है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण और बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे ऐतिहासिक कार्य संभव हुए हैं।

अर्धकुंभ 2027 की भव्य तैयारियां शुरू

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ को भी पूर्ण कुंभ की भव्यता और दिव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कोविड महामारी के कारण कई श्रद्धालु कुंभ स्नान से वंचित रह गए थे, इसलिए आगामी आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। घाटों के विकास, आधारभूत ढांचे के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उत्तराखंड के देवत्व, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान की रक्षा हर कीमत पर की जाएगी और यह केवल सरकार नहीं बल्कि पूरे सनातन समाज का संकल्प है।

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