
भारतीय रेलवे में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में रेल मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा के बाद रेलवे बोर्ड की समितियों ने पांच वरिष्ठ अधिकारियों को जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने की सिफारिश की है। यह कार्रवाई सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
रेलवे बोर्ड की समीक्षा के बाद बड़ा फैसला
रेल मंत्रालय ने भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए रेलवे के पांच ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों को समय से पहले रिटायर करने की सिफारिश की है। यह निर्णय रेलवे बोर्ड की समीक्षा समितियों द्वारा भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (Indian Railway Establishment Code) के नियम 1802(a), जो फंडामेंटल रूल 56(j) के समकक्ष है, के तहत लिया गया।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
सिफारिश किए गए अधिकारियों में भारतीय रेलवे स्वास्थ्य सेवा (IRHS) के दो वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर रेलवे के भारतीय रेलवे सिविल इंजीनियरिंग सेवा (IRSE) के एक जूनियर प्रशासनिक ग्रेड (JAG) अधिकारी, भारतीय रेलवे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सेवा (IRSEE) के एक अधिकारी तथा पश्चिम रेलवे के भारतीय रेलवे ट्रैफिक सेवा (IRTS) के एक जूनियर प्रशासनिक ग्रेड अधिकारी का नाम भी शामिल है।

सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद निर्णय
रेल मंत्रालय के अनुसार किसी भी अधिकारी के खिलाफ निर्णय लेने से पहले तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया। समीक्षा समितियों ने संबंधित अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR), ईमानदारी से जुड़े रिकॉर्ड, विजिलेंस रिपोर्ट, अनुशासनात्मक कार्रवाई के इतिहास और अन्य सेवा अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण किया। इसके बाद सर्वसम्मति से समयपूर्व सेवानिवृत्ति की सिफारिश की गई।
क्या कहता है नियम 1802(a)?
भारतीय रेलवे स्थापना संहिता का नियम 1802(a) सरकार को यह अधिकार देता है कि यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन या सेवा रिकॉर्ड जनहित के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय से पहले सेवानिवृत्त किया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रेलवे में भ्रष्टाचार, ईमानदारी की कमी और कार्य में लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पूरे तंत्र में ईमानदार और कुशल कार्यसंस्कृति को मजबूत करना है।
रेल मंत्रालय का यह फैसला केवल पांच अधिकारियों तक सीमित कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे रेलवे तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि जवाबदेही और ईमानदारी से कोई समझौता नहीं होगा। आने वाले समय में ऐसी समीक्षा प्रक्रियाएं प्रशासनिक सुधारों को और गति दे सकती हैं तथा यात्रियों के लिए अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय रेलवे व्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
