
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम अभी आना बाकी है, लेकिन उससे पहले ही महागठबंधन के भीतर सियासी तल्खी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नतीजों से पहले तेज हुई बयानबाजी
30 जुलाई को हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मतगणना 3 अगस्त को होनी है, लेकिन उससे पहले कांग्रेस और RJD के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब महागठबंधन आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर एकजुट होने का दावा करता रहा है।
कांग्रेस ने RJD पर लगाए गंभीर आरोप
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने आरोप लगाया कि बांकीपुर उपचुनाव में RJD ने कांग्रेस को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर इस बात पर चर्चा हो रही है कि कहीं तेजस्वी यादव की बीजेपी से कोई राजनीतिक समझ तो नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उपचुनाव के बाद मिले फीडबैक से RJD के पारंपरिक मुस्लिम-यादव वोट बैंक में बिखराव के संकेत मिले हैं। तिवारी ने 2025 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कई सीटों पर RJD और कांग्रेस के बीच फ्रेंडली फाइट देखने को मिली थी।

RJD ने किया तीखा पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर RJD ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने सवाल उठाया कि इस तरह के बयान किसके इशारे पर दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेता हैं और लगातार बीजेपी के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। एजाज अहमद ने दावा किया कि तेजस्वी यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी सांप्रदायिक ताकतों से समझौता नहीं किया है।
वोटिंग प्रतिशत और राजनीतिक समीकरण
बांकीपुर उपचुनाव में इस बार लगभग 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की मौजूदगी के कारण मुकाबला काफी चर्चित रहा। विभिन्न राजनीतिक आकलनों और सर्वेक्षणों में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
RJD ने इस सीट से एक बार फिर रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की प्रत्याशी थीं।
परिणाम से पहले बढ़ी राजनीतिक बेचैनी
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले गठबंधन के भीतर सार्वजनिक बयानबाजी विपक्षी एकता पर असर डाल सकती है। हालांकि, अंतिम राजनीतिक तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी कि यह विवाद अस्थायी है या भविष्य में महागठबंधन की रणनीति को प्रभावित करेगा।
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आने से पहले ही महागठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अब सबकी नजर 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर है, जो न केवल इस सीट का फैसला करेंगे बल्कि बिहार की विपक्षी राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।
