
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि निर्दोष लोगों को उनके घरों से उठाया गया और प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उपचुनाव से पहले पटना पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया, उन्हें चुनाव में गड़बड़ी फैलाने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-163 के उल्लंघन के आरोप में डिटेन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता।
‘घर में सो रहे लोगों को उठा लिया गया’
जन सुराज प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, उनमें से कई अपने घरों में सो रहे थे। उनका सवाल था कि यदि कोई व्यक्ति अपने घर में मौजूद था, तो वह धारा-163 का उल्लंघन कैसे कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि कुल 50 से अधिक लोगों को उठाया गया, जिनमें अधिकांश पटना के स्थानीय निवासी थे।

देर रात दबिश देने का आरोप
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रात करीब दो से तीन बजे के बीच कई घरों में दबिश देकर लोगों को हिरासत में लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड नंबर 22 में पुलिस खुलेआम लोगों को धमका रही थी और मतदाताओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी।
पटना SSP पर साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने उन्हें “अनप्रोफेशनल” बताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को राजनीति करनी है तो पहले सरकारी सेवा छोड़नी चाहिए।
चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी इस पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग से करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। उनका कहना है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए तथा प्रशासनिक कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
