
बिहार की राजनीति में सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। उन्होंने मुंगेर में साफ कहा था कि यदि सरकारी जमीन पर किसी ने घर बनाया है तो उसे हटाया जाएगा और कोई भी इसे नहीं रोक सकता। इस बयान के बाद पूरे राज्य में चर्चा शुरू हो गई है कि आगे जमीन अतिक्रमण को लेकर सरकार की नीति कैसी होगी।
चिराग पासवान ने दिया संतुलित और मानवीय रुख
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिक संतुलित रुख अपनाने की बात कही। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई जरूरी है लेकिन किसी निर्दोष या गरीब परिवार के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बाधा बनने वाले अतिक्रमण हटाए जा सकते हैं लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि वैध अधिकार वाले लोगों के घर न टूटें। उनका कहना था कि कानून का पालन जरूरी है लेकिन मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही आवश्यक है।

गरीबों के लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
चिराग पासवान ने इस दौरान यह भी कहा कि किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले सरकार को गरीब परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर किसी का घर हटाया जाना है तो पहले उसे रहने के लिए दूसरी जगह दी जाए, उसके बाद ही कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के घर उजाड़ना सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकता है और इससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिए जाएं।
शराबबंदी कानून और नीति सुधार पर भी जताई राय
इस बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कानून की मूल भावना सही है और यह समाज सुधार के उद्देश्य से लागू किया गया था लेकिन इसमें कुछ खामियां भी हैं जिन्हें सुधारने की जरूरत है। उन्होंने जहरीली शराब और सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब के मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को इन त्रुटियों को दूर करना चाहिए। उनके अनुसार, कानून को और प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है ताकि इसका उद्देश्य पूरी तरह सफल हो सके।
