राहुल गांधी के धरने के बीच साहिल लोचब की वकील का बड़ा दावा, थाने दर थाने घूमे फिर भी FIR नहीं हुई

दिल्ली के संसद मार्ग थाने में राहुल गांधी के धरने के दौरान साहिल लोचब की वकील ने पुलिस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए वह कई थानों और क्राइम ब्रांच के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।
राहुल गांधी के धरने के बीच उठा FIR का मुद्दा
दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई में घायल हुए साहिल लोचब का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे।
इसी दौरान लोचब की वकील ने मीडिया के सामने पुलिस के रवैये को लेकर अपनी बात रखी और शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया।
‘थाने दर थाने घूम रहे हैं’
वकील के मुताबिक, 14 अगस्त को वह कनॉट प्लेस थाने पहुंची थीं। वहां उन्हें बताया गया कि 20 तारीख से जुड़े मामले संसद मार्ग थाने में हैं। इसके बाद वह संसद मार्ग थाने पहुंचीं, जहां कथित तौर पर उन्हें SHO के आने का इंतजार करने को कहा गया।
वकील का दावा है कि बाद में फोन पर बातचीत के दौरान उन्हें डीसीपी क्राइम ब्रांच, आरके पुरम जाने को कहा गया। उनका कहना है कि उन्होंने शिकायत को दर्ज कर उसे क्राइम ब्रांच से जोड़ने के लिए DD नंबर मांगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

क्राइम ब्रांच में भी नहीं हुई FIR
वकील ने बताया कि इसके बाद वह क्राइम ब्रांच पहुंचीं। वहां उन्हें बताया गया कि क्राइम ब्रांच सीधे FIR दर्ज नहीं करती और इसके लिए संबंधित पुलिस स्टेशन के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
उनके मुताबिक, यही बात वह पहले संसद मार्ग थाने के अधिकारियों को समझाने की कोशिश कर रही थीं। वकील ने दावा किया कि शिकायत पर उन्हें केवल रिसीविंग मिली है और FIR अब तक दर्ज नहीं हुई।
‘FIR के लिए नेता प्रतिपक्ष को आना पड़ा’
वकील ने कहा कि स्थिति ऐसी हो गई कि शिकायत पर कार्रवाई और FIR दर्ज कराने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को थाने तक आना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पीड़ित की शिकायत और मेडिकल दस्तावेज मौजूद हैं तो FIR दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
उनका दावा है कि लेडी हार्डिंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में पैलेट गन के छर्रे लगने का उल्लेख है।
साहिल लोचब को आंख में गंभीर चोट का दावा
साहिल लोचब और उनके परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में वह पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए।
राहुल गांधी ने जुलाई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोचब को मीडिया के सामने भी पेश किया था। परिवार के मुताबिक, उनकी दाईं आंख में गंभीर चोट आई और आंख की रोशनी जाने का खतरा भी बताया गया था।
अब पुलिस कार्रवाई पर निगाह
इस मामले में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल FIR दर्ज होने और शिकायत पर आगे की कार्रवाई को लेकर है। वकील के दावों के बाद पुलिस की प्रक्रिया पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस और तेज हो सकती है।
दूसरी ओर, मामले में आरोपों की जांच और मेडिकल रिकॉर्ड समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने आना जरूरी है। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक FIR का नहीं, बल्कि छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही से जुड़े गंभीर सवालों का रूप ले चुका है।
