
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर सियासी तस्वीर बदल दी है। अब पार्टी की महिला नेता अमनजोत कौर रामू वालिया ने अकाली दल और बादल परिवार को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने गठबंधन की अटकलों पर विराम लगा दिया।
117 सीटों पर अकेले उतरेगी BJP
पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही बीजेपी-अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल बड़ा झटका लगा है।
अमनजोत कौर का दो टूक बयान
बीजेपी नेता अमनजोत कौर रामू वालिया ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शिरोमणि अकाली दल के साथ समझौते के पक्ष में नहीं हैं। उनका दावा है कि अकाली दल के साथ गठबंधन से बीजेपी के विस्तार पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वह खुद अकाली दल में रह चुकी हैं और उन्हें पता है कि उस समय बीजेपी को गांवों में प्रवेश करने से रोकने के निर्देश दिए जाते थे।

‘हमने अपना कैडर तैयार किया है’
अमनजोत कौर ने कहा कि बीजेपी ने पंजाब की सभी 117 सीटों पर अपना संगठन मजबूत किया है। उनके मुताबिक पार्टी के पास बूथ स्तर तक कार्यकर्ता और संभावित उम्मीदवार मौजूद हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीजेपी ने अपना मजबूत कैडर तैयार कर लिया है तो वह किसी दूसरी पार्टी के लिए काम क्यों करे। उनका कहना है कि पार्टी अब अपने संगठन और राजनीतिक विस्तार पर ध्यान देगी।
बादल परिवार को लेकर सख्त रुख
सबसे ज्यादा चर्चा अमनजोत कौर के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने सुखबीर सिंह बादल और बादल परिवार को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जब तक अकाली दल में सुखबीर बादल और उनका परिवार शीर्ष नेतृत्व में है, तब तक बीजेपी उस पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है।
पंजाब की राजनीति में बढ़ेगी दूरी?
बीजेपी के 117 सीटों पर अकेले लड़ने के ऐलान और अब अमनजोत कौर के बयान से पंजाब में BJP-SAD गठबंधन की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही हैं। दोनों दल पहले भी साथ चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं।
चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा असर
बीजेपी का अकेले मैदान में उतरना पंजाब के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी अपने दम पर 117 सीटों पर कितना मजबूत प्रदर्शन कर पाती है और अकाली दल के साथ रिश्तों में यह दूरी आगे चलकर स्थायी राजनीतिक अलगाव में बदलती है या नहीं।
