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पंचकूला और दिल्ली में होगा देश के सबसे ऊंचे रावण का दहन

221 फीट की होगी ऊंचाई, 7 टन लगेगा लोहा

Effigies of Ravana : इस साल दशहरा पर्व पर दिल्ली और पंचकूला में देश के सबसे उंचे रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। पहले बराड़ा में सबसे ऊंचे रावण का दहन किया जाता था लेकिन जगह कम होने के कारण 2017 में यह सफर खत्म हो गया था। अब पंचकूला में देश का सबसे ऊंचा रावण दहन किया जाएगा।

देश में सबसे ऊंचे रावण बनाने के विशेषज्ञ तेजेंद्र चौहान की माने तो दिल्ली और पंचकूला के अलावा देहरादून से भी ऊंचे रावण का आर्डर आया है। पंचकूला और दिल्ली में 221 फीट का रावण का दहन होगा जबकि देहरादून में इसकी ऊंचाई 181 फीट रखी गई है।

इस तरह से है ऊंचाई

रावण के जो पुतले 221 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं। उनमें हर हिस्से की अलग ऊंचाई है। इसके तहत रावण के सिर पर 58 फीट का मुकुट, चेहरा 25 फीट, गर्दन 8 फीट और धड़ 90 फीट, पैरों की ऊंचाई 40 फीट, जूतियों की ऊंचाई दस फीट, रावण के हाथ में तलवार 50 फीट, जूते की लंबाई 40 फीट है।

इसी तरह रावण का जो पुतला 181 फीट का है, उसमें मुकुट 45 फीट, चेहरा 20 फीट, गर्दन 6 फीट, धड़ 80 फीट, पैर 32 फीट, जूते की ऊंचाई छह फीट तथा लंबाई 36 फीट तथा रावण की तलवार 35 फीट की है।

इस बार कोटा से नहीं आए कारीगर

इस बार राजस्थान के कोटा में चौहान अपने कारीगरों के साथ नहीं पहुंचे हैं, जबकि उक्त तीनों स्थानों पर साढ़े तीन माह से रावण के पुतलों को तैयार किया जा रहा है। इन तीनों पुतलों को बनाने में अंबाला के ही कारीगर जुटे हैं। बराड़ा से चौहान अपनी टीम लेकर चलते हैं। एक पुतला बनाने में चालीस करीगरों की टीम लगती है यानी तीनों पुतले बनाने में कुल 120 कारीगर जुटे हैं।

खास है कि इन पुतलों को बनाने के बाद खड़ा करने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ता है। यह पुतले भी टुकड़ों में बनते हैं। पुतले का हर हिस्सा अलग तैयार किया जाता है और बाद में इनको जोड़ा जाता है। यह पुतले कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगते हैं। देश में बनने वाले रावण के यह सबसे बड़े पुतले हैं।

तीन पुतलों पर एक करोड़ 10 लाख का खर्च

इन तीनों पुतलों पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा कुल एक करोड़ दस लाख रुपये का खर्च होगा। इन में ही इन दिनों तेजेंद्र चौहान जुटे हैं और दशहरे से पहले इन रावण के पुतलों को खड़ा कर दिया जाएगा।

तीनों पुतलों पर 20.5 टन लोहा लगेगा

चौहान ने बताया कि तीनों स्थानों पर बनने वाले रावण के पुतलों में 20.50 टन लोहे का इस्तेमाल किया जाएगा। ऊचाई के हिसाब से यह तय होता है। दिल्ली और पंचकूला में जो रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उनमें प्रति पुतले में सात टन लोहा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी तरह देहरनादून में बनने वाले रावण के पुतले में साढ़े छह टन लोहा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा प्रति पुतले में दो लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई जाएगी, जो ईको फ्रेंडली होगी।

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