मर्सी चांस की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र बेचे जा रहे 20 से 25 हजार में
व्हाट्सएप चैट में हो रहे सौदे, प्रशासन ने कहा अभी शिकायत नहीं मिली
MDU Paper Leak : हरियाणा के रोहतक में स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी अपने विवादों को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। ताजा मामले में मर्सी चांस परीक्षाओं के पेपर परीक्षा से पहले बेचे जाने के आरोपों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (NSO) के प्रदेशाध्यक्ष सुधीर सहारण ने दावा किया है कि छात्रों को व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है और इसके बदले 20 से 25 हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि उसके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।
आरोपों की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि NSO की ओर से कथित तौर पर एक छात्र और पेपर उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग तथा व्हाट्सएप चैट भी जारी करने का दावा किया गया है। कथित चैट में समाधान उपलब्ध कराने और शीट खाली न छोड़ने जैसी बातें कही गई हैं। यदि ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो सवाल केवल एक पेपर या एक परीक्षा का नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और विश्वसनीयता पर खड़ा होगा।
हरियाणा में लाखों परिवार अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद में कॉलेज और विश्वविद्यालय भेजते हैं। माता-पिता फीस भरते हैं, छात्र महीनों मेहनत करते हैं और प्रतियोगिता में आगे निकलने के लिए दिन-रात पढ़ते हैं। ऐसे में यदि पैसे के दम पर परीक्षा से पहले पेपर हासिल करने का कोई नेटवर्क सक्रिय है तो सबसे बड़ा नुकसान उस मेहनती छात्र का है, जो ईमानदारी से परीक्षा देता है। यह शिक्षा व्यवस्था में बराबरी के सिद्धांत पर सीधा प्रहार होगा। इस पूरे मामले में MDU प्रशासन के साथ-साथ भाजपा सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार प्रदेश में पारदर्शिता और मजबूत शिक्षा व्यवस्था के दावे करती रही है, लेकिन राज्य के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में परीक्षा की गोपनीयता को लेकर इतने गंभीर आरोप सामने आना उन दावों को कटघरे में खड़ा करता है। सवाल यह है कि अगर छात्रों तक परीक्षा से पहले पेपर पहुंचाने की पेशकश की जा रही थी तो विश्वविद्यालय की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था क्या कर रही थी? पेपर तैयार होने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी चेन की जवाबदेही किसकी है?
इस मामले में खास बात यह है कि प्रशासन का शुरुआती जवाब है कि उसके सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं आई। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल लिखित शिकायत आने का इंतजार करेगा, या सार्वजनिक रूप से सामने आए गंभीर आरोपों और कथित डिजिटल साक्ष्यों की अपने स्तर पर जांच भी कराएगा? परीक्षा की विश्वसनीयता बचाने के लिए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
MDU के कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन डॉ. राहुल ऋषि ने आरोपों पर कहा है कि विश्वविद्यालय में परीक्षाएं निष्पक्ष तरीके से कराई जा रही हैं और उनके सामने पेपर खरीदने-बेचने या WhatsApp के जरिए पेपर उपलब्ध कराने की कोई शिकायत नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई शिकायत या जानकारी सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। जिस परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी पाई गई, उसे रद्द किया जाएगा और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं बल्कि आरोपों की समयबद्ध जांच की है। कथित WhatsApp चैट और रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए, पेपर की कस्टडी चेन खंगाली जानी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि क्या वास्तव में परीक्षा से पहले किसी प्रश्नपत्र तक बाहरी व्यक्ति की पहुंच बनी थी।
इस मामले में एनएसओ के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर सहारण क्या कहना है कि वह सोमवार को इस मामले में एमडीयू प्रशासन को विधिवत रूप से शिकायत देंगे।
