
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मुद्दा अचानक सियासत के केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल की मांग राज्यपाल के सामने रखी है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।
राज्यपाल से मिले भगवंत मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने का अनुरोध किया। मान ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल को भरोसा दिया है कि पैरोल मिलने की स्थिति में पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी।
हवारा की मां की खराब सेहत को पैरोल की मांग का मुख्य आधार बताया गया है। इससे पहले भी उनकी ओर से पैरोल की मांग को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। जुलाई 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आवेदन पर तय समयसीमा में फैसला लेने के निर्देश दिए थे।
बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद
जगतार सिंह हवारा पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वह फिलहाल दिल्ली की जेल में बंद हैं। हवारा ने अपनी मां की खराब सेहत के आधार पर पैरोल की मांग की थी।

मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि हवारा का नाम पंजाब की पंथक राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में उनकी पैरोल का फैसला केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।
कुछ महीने पहले सरकार का रुख अलग था
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू पंजाब सरकार के रुख में बदलाव है। रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च 2026 में पंजाब सरकार ने तिहाड़ प्रशासन को हवारा की पैरोल याचिका खारिज करने की सिफारिश की थी। उस समय उनके खिलाफ दर्ज मामलों और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को आधार बनाया गया था।
अब मुख्यमंत्री खुद पैरोल की सिफारिश कर रहे हैं। इसी बदलाव को लेकर विपक्षी दल AAP सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
कांग्रेस और अकाली दल का समर्थन
मान की पहल का कांग्रेस के नेताओं ने स्वागत किया है। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने भी मानवीय आधार पर हवारा को पैरोल देने की वकालत की है। हालांकि अकाली दल ने AAP पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है।
भाजपा ने भी सीधे तौर पर पैरोल का विरोध नहीं किया, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा इस समय सिफारिश किए जाने पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में लगभग सभी प्रमुख दलों का रुख इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना रहा है।
2027 चुनाव से पहले पंथक राजनीति
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में सिख पंथक वोटरों के बीच प्रभाव रखने वाले मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता स्वाभाविक रूप से बढ़ी है।
जगतार सिंह हवारा की पैरोल की मांग ऐसे समय आई है, जब पंजाब में पंथक राजनीति के कई नए समीकरण भी उभर रहे हैं। जेल में बंद अमृतपाल सिंह से जुड़े राजनीतिक प्रभाव और नए संगठनों की सक्रियता ने इस क्षेत्र को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
फैसला मानवीय आधार पर या राजनीतिक संदेश?
हवारा की मां की खराब सेहत निश्चित रूप से मानवीय आधार पर पैरोल की मांग को मजबूत करती है। लेकिन जिस समय यह मुद्दा उठा है, उसमें राजनीति की परछाईं से इनकार करना भी आसान नहीं है।
अब गेंद राज्यपाल और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के पाले में है। अगर पैरोल मंजूर होती है तो यह सिर्फ एक कैदी की अस्थायी रिहाई नहीं होगी, बल्कि पंजाब की राजनीति में पंथक मुद्दों, कानून-व्यवस्था और 2027 के चुनावी समीकरणों पर नई बहस की शुरुआत भी कर सकती है।
