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कांग्रेस, भाजपा और जजपा तीनों पर साध रहे अभय चौटाला निशाने

Abhay Chautala : भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की जयंती पर मेवात में होने वाली इनेलो की रैली इनेलो के राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। करीब 2 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में अभय चौटाला खुद चुनाव हार गए थे। उनकी पार्टी दो सीटों पर चुनाव जीतने में सफल रही थी। इनेलो की यह रैली इनेलो को राजनीतिक रूप से ऑक्सीजन देने का काम करेगी। रैली के सफल होने पर इनेलो के कार्यकर्ताओं का जोश और उत्साह चार गुना हो जाएगा।

इस बात को अभय चौटाला अच्छी प्रकार से जानते हैं। पूरे हरियाणा का दौरा लगभग पूरा कर चुके हैं। इनेलो चौधरी देवीलाल की जयंती पर 25 सितंबर को रैली आयोजित करती रही है। इस बार रैली चूंकि मेवात में है और 25 सितंबर को जुम्मा है। ऐसे में अभय चौटाला ने रैली 2 दिन बाद करने का फैसला किया।

इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला ने भिवानी में बताया कि चौधरी देवीलाल की जयंती के उपलक्ष्य में 27 सितंबर को नूंह में राज्यस्तरीय रैली होगी। ये रैली प्रदेश के इतिहास में ऐतिहासिक होगी। उन्होंने दावा किया कि जनता बदलाव के मूड में है और इस रैली के बाद प्रदेश के हर आम आदमी की जुबान पर यही होगा कि हरियाणा में अगली सरकार केवल इंडियन नेशनल लोकदल की बनेगी।

कांग्रेस, भाजपा और जजपा तीनों पर साध रहे अभय चौटाला निशाने

कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए इनेलो नेता ने कहा कि कांग्रेस के भीतर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हुड्डा ने अपने रास्ते में आने वाले सभी नेताओं चाहे वे राव इंद्रजीत हों, कुमारी सैलजा हों या कुलदीप बिश्नोई, सभी को दरकिनार किया है।

राज्यसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के नौ विधायकों के वोट कहां गए और आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल एक समानांतर गुटबाजी बनकर रह गई है। इसके अलावा जेजेपी पर निशाना साधते हुए अभय चौटाला ने कहा कि जो दल कभी घरों में बैठे रहते थे, आज वो जनता के बीच जाने को मजबूर हैं।

प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए चौटाला ने कहा कि आज फिरौती, अपहरण और लूटपाट जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि मंडियों में धान और बाजरे की सरकारी खरीद में जानबूझकर अड़चनें पैदा की जा रही हैं। सरकार की नीतियों के कारण किसान अपनी फसलों

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