
जालंधर में लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) नीति के विरोध में वकीलों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 21वें दिन भी बार एसोसिएशन ने संघर्ष जारी रखते हुए ‘नो वर्क डे’ का ऐलान किया और सभी अधिवक्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।
21वें दिन भी जारी रहा विरोध प्रदर्शन
जालंधर जिला बार एसोसिएशन का LADC (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) नीति के खिलाफ चल रहा आंदोलन मंगलवार को 21वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन के तहत 34 वकील भूख हड़ताल पर बैठे और सरकार से अपनी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग दोहराई। बार एसोसिएशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
‘नो वर्क डे’ का ऐलान, अदालतों में कामकाज प्रभावित
बार एसोसिएशन ने एक बार फिर ‘नो वर्क डे’ घोषित किया है। इसके तहत अधिवक्ता अदालतों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में किसी भी प्रकार का पेशेवर कार्य नहीं करेंगे। एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे आंदोलन के दौरान किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक कार्य में भाग न लें।

नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सदस्य आंदोलन के दौरान अदालत या अन्य कार्यालयों में पेशेवर कार्य करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही सभी सदस्यों से भूख हड़ताल पर बैठे वकीलों के प्रति नैतिक समर्थन और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की अपील की गई है।
कई सरकारी विभागों से मांगा सहयोग
आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए बार एसोसिएशन ने कमिश्नर कार्यालय, डिविजनल कमिश्नर कार्यालय, डिप्टी कमिश्नर, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालयों, तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्यालयों, श्रम न्यायालय, औद्योगिक न्यायाधिकरण तथा सहकारी समितियों के संयुक्त एवं उप-पंजीयक कार्यालयों सहित कई विभागों से सहयोग की अपील की है।
क्या है वकीलों की मांग?
बार एसोसिएशन का कहना है कि LADC नीति को लेकर अधिवक्ताओं की कई आपत्तियां हैं और इन्हें गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनका मानना है कि नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार और संबंधित अधिकारियों के साथ सार्थक संवाद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आंदोलन जारी रखा गया है।
जालंधर बार एसोसिएशन का आंदोलन अब लंबा खिंचता नजर आ रहा है। भूख हड़ताल, ‘नो वर्क डे’ और सामूहिक विरोध से यह स्पष्ट है कि वकील अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं। अब सभी की निगाहें सरकार और संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे बातचीत के जरिए इस गतिरोध का समाधान कैसे निकालते हैं।
