पंजाब में भाजपा को रोकने के लिए साथ आ सकते हैं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस

Punjab Politics : पंजाब विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा अपनी पूरी ताकत लगाकर सरकार बनाने का सपना देख रही है वहीं अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को नजदीक लाने और भाजपा का सपना पूरा होने से रोकने की कवायद भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल दोनों का नजदीकी माना जाता है और वह वर्तमान में पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों को एक मंच पर लाने का प्रयास करने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव फरवरी मार्च में होने वाले हैं। यूपी में कांग्रेस के समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है लेकिन पंजाब को लेकर स्थिति अलग है। यह गैर एनडीए शासित राज्य है और यहां पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस है। इन दोनों राज्यों के साथ उत्तराखंड, गोआ और मणिपुर में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनावों को लेकर सरगर्मी बढ़ने के साथ एक बड़ी चर्चा सामने आई है। यह चर्चा पंजाब में महागठबंधन को लेकर है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का किला ढहने, बगावत में पार्टी के टूटने और अब पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी चले जाने के बाद समाजवादी पार्टी बेहद सतर्क हैं। दावा किया जा रहा है कि बीजेपी के आक्रामक अभियान को देखते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को एक साथ लाने की कवायद अंदरखाने शुरू हो गई है। दावा यहां तक किया जा रहा है कि इस पूरी रणनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव मध्यस्थ की सबसे अहम भूमिका में हैं। उनके रिश्ते राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल दोनों के साथ बेहतर हैं। चर्चा है कि पंजाब में दोनों दल साथ आते हैं तो इसका लाभ 2027 में गुजरात और गोवा विधानसभा चुनाव में भी मिल सकता है।

पहले पास आ चुके हैं दोनों दल
अरविंद केजरीवाल पहली बार कांग्रेस के सहयोग से सीएम बने थे। दिसंबर 2013 में भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से थोड़े समय (49 दिनों) के लिए सरकार बनाई थी। इसके अलावा, जनवरी 2024 में चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए भी दोनों दलों ने आपस में तालमेल किया था। 2024 लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने 24 फरवरी 2024 को दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, गोवा और चंडीगढ़ में सीटों के बंटवारे के तहत गठबंधन का ऐलान किया था।
बंगाल-बिहार से BJP हुई मजबूत
सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अरविंद केजरीवाल से बात कर उन्हें गठबंधन के लिए राजी करने में जुटी हैं। जबकि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी इस एकजुटता के पक्ष में हैं। राजनीतिक विश्लेषक भी यह मान रहे हैं कि क्षेत्रीय दलों का अब बीजेपी से अकेले लड़ पाना संभव नहीं है। बीजेपी दिल्ली मॉडल को अब पंजाब में दोहराना चाहती है। बंगाल में जीत और बिहार में सत्ता हासिल करने के बाद बीजेपी के हौंसले पूरी तरह से बुलंद हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर बीजेपी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में सत्ता बरकरार रखते हुए पंजाब में स्थिति मजबूत करती है तो 2029 में विपक्ष की हालात दयनीय हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अखिलेश और ममता बनर्जी नहीं चाहते कि बंगाल की तरह पंजाब में भी विपक्ष बिखराव का शिकार होकर भाजपा को वॉकओवर दे दे। ताजा मामले में डीयू चुनावों में विपक्ष के बिखराव से एबीवीपी को बड़ी जीत मिली है। बंगाल में 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के किले को ढहाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी। चर्चा है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब में पूरी ताकत झोंकेगी। उसका अगला लक्ष्य पंजाब है। इंडिया गठबंधन के नेताओं को यह अहसास होने लगा है कि अगर अभी एकजुटता नहीं दिखाई तो सिर्फ पंजाब ही हाथ से नहीं जाएगा। 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का सपना भी अधूरा रह सकता है।
