
देशभर में पेपर लीक को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पंजाब का मामला संसद तक पहुंच गया है। मानसून सत्र के दौरान NDA सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर पंजाब सरकार को निशाने पर लिया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी।
संसद के बाहर NDA का जोरदार प्रदर्शन
मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान मकर द्वार पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य NDA सांसदों ने पंजाब में कथित पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने नारेबाजी करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार से मामले पर जवाब देने की मांग भी की।
फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा बना विवाद की वजह
विवाद की शुरुआत 19 जुलाई को आयोजित पंजाब फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा से हुई। 454 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में करीब 7,000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्ष ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप
पंजाब बीजेपी ने राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि परीक्षा केंद्र के भीतर प्रश्नपत्र को स्कैन कर बाहर भेजा गया, फिर उसे हल कर ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए कुछ अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाए गए। इन आरोपों को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
पुराने मामलों का भी दिया हवाला
बीजेपी ने अपने आरोपों के समर्थन में राज्य की कई अन्य भर्ती और परीक्षा विवादों का भी उल्लेख किया। इनमें नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) की 12वीं अंग्रेजी परीक्षा, PSTET परीक्षा विवाद और पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कथित मामलों का हवाला दिया गया। विपक्ष का कहना है कि ये घटनाएं परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती हैं।
सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
पेपर लीक का मुद्दा अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन चुका है। हालांकि, इस मामले में जांच और सरकारी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालती हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पंजाब सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं।
