एक कलम से पक्के नहीं होंगे गैस्ट टीचर, हर टीचर का अलग केस
स्पीकिंग आर्डर से बताया जाएगा कौन पक्का होगा और कौन नहीं

Guest Teachers : हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 साल से पढ़ा रहे 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट में 2 महीने में गेस्ट टीचरों को पक्का करने के आदेश दिए थे। सरकार ने गेस्ट टीचरों को पक्का करने के मामले में अब कार्रवाई शुरू की है। माना जा रहा है कि सरकार जिस तरीके से कार्रवाई कर रही है उसमें करीब आधे गेस्ट टीचर ही पक्का हो पाएंगे।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने पहली बार प्रत्येक शिक्षक की सेवा का पूरा इतिहास खंगालकर यह तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि कौन नियमितीकरण की शर्तें पूरी करता है और कौन नहीं। यानी अब नियमितीकरण का दावा केवल लंबी सेवा के आधार पर नहीं, बल्कि हर शिक्षक के नियुक्ति रिकॉर्ड और कानूनी पात्रता के आधार पर तय होगा।
शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को याचिकाकर्ता गेस्ट टीचरों के अलग-अलग रिकॉर्ड जुटाने के निर्देश दिए हैं। नियुक्ति पत्र, नियुक्ति की प्रकृति और तारीख, कार्यग्रहण, सेवा की निरंतरता, सेवा में ब्रेक, पद की स्वीकृति व उसकी स्थिति और शैक्षणिक योग्यता समेत पूरा रिकॉर्ड जांचा जाएगा। इसके बाद प्रत्येक शिक्षक की ‘स्पीकिंग रिपोर्ट’ तैयार होगी, जिसमें स्पष्ट कारण के साथ बताया जाएगा कि वह नियमितीकरण के लिए पात्र है या नहीं।
अब तीन सवाल तय करेंगे नियमितीकरण का रास्ता
विभाग की जांच में मूल रूप से यह देखा जाएगा कि शिक्षक की नियुक्ति किस आधार पर हुई, जिस पद पर वह काम कर रहा था वह स्वीकृत था या नहीं और उसकी सेवा लगातार रही या बीच में ब्रेक आया। इसके साथ शैक्षणिक योग्यता और दूसरे निर्धारित मानकों की भी जांच होगी। इस तरह करीब दो दशक की सेवा वाले प्रत्येक शिक्षक का मामला अलग फाइल और अलग कानूनी निष्कर्ष के साथ सामने आएगा। जांच का आधार 16 जून, 2014 की राज्य सरकार की नियमितीकरण नीति और सुप्रीम कोर्ट का 16 अप्रैल, 2026 का मदन सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार फैसला होगा। इससे मामला अब केवल सरकार और गेस्ट टीचरों के बीच मांग-स्वीकृति का नहीं, बल्कि अदालत की तय कसौटियों पर पात्रता साबित करने का बन गया है।
अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय
शिक्षा विभाग ने रिकॉर्ड तैयार करने में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगने की संभावना जताई गई है। रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध न कराने वाले अधिकारी या कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। पीजीटी गेस्ट टीचरों से नियुक्ति, कार्यग्रहण, स्थानांतरण या कार्य परिवर्तन आदेश, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, मूल सेवा पंजिका, मेरिट और पुलिस वेरिफिकेशन समेत दस्तावेज मांगे गए हैं। गेस्ट टीचर प्रतिनिधि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया के समक्ष भी नियमितीकरण का मुद्दा उठा चुके हैं।
सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, दो दशक की सेवा का भी
गेस्ट टीचरों का तर्क है कि वे 20-21 साल से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और उनके अनुभव को नियमितीकरण में आधार बनाया जाना चाहिए। इसी बीच सेवा के दौरान शिक्षकों की मौत के मामले भी संगठन की चिंता बढ़ा रहे हैं। गेस्ट टीचरों के मीडिया प्रभारी डॉ़ अजय लोहान के अनुसार कैथल में पिछले 17 दिनों में चार अतिथि अध्यापकों की मौत हुई है और जिले में अब तक यह संख्या 38 हो चुकी है। शिक्षक नेताओं ने दिवंगत शिक्षकों के परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि व्यक्ति-वार रिकॉर्ड की इस कानूनी छंटनी के बाद 12 हजार दावों में से कितने नियमितीकरण की कसौटी पर खरे उतरते हैं।