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84 लाख बिजली उपभोक्ताओं को 1,134.54 करोड़ की राहत, HERC ने FSA वसूली की याचिका खारिज की

एचईआरसी ने बिजली निगमों की एफएसए वसूली याचिका खारिज की

Decision of HERC : हरियाणा बिजली विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। उपभोक्ताओं को ईंधन सरचार्ज समायोजन (एफएसए) में 1134.54 करोड़ रुपये नहीं देने पड़ेंगे। बिजली निगमों की याचिका को अस्वीकार कर दिया गया है। आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि बिजली निगम की लापरवाही का भुगतान उपभोक्ता क्यों करें?

पूर्व मंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने एचईआरसी में सुनवाई के दौरान निगमों की याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि बिजली कंपनियां कानून और निर्धारित समय-सीमा की अनदेखी करके उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाल सकती।

उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा नवंबर 2025 में एफएसए राशि की वसूली का प्रयास किया गया था। यह राशि निर्धारित समय में बिजली बिलों में नहीं जोड़ी गई, जिसके कारण जनवरी 2026 में यह राशि नियमों के अनुसार जब्त हो गई थी।

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि एचईआरसी द्वारा इस राशि की दोबारा वसूली की अनुमति नहीं देना उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला है। बिजली निगमों की देरी या प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। उपभोक्ता बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली की कमियों की कीमत क्यों चुकाए। अब बिजली वितरण कंपनियों को निर्धारित नियमों और समय-सीमा का पालन करना होगा।

उन्होंने कहा कि अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बिजली निगमों को जवाब देना बाकी है। वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ नहीं दिया गया।

उनका जनहित में संघर्ष वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित ‘वार्षिक राजस्व प्राप्तियों’ पर होने वाली आगामी सुनवाई में भी जारी रहेगा और वे निगमों के ‘‘पिछले दरवाजे से एंट्री’’ के प्रयास को हर हाल में रोकेंगे। फिक्स्ड चार्ज, बढ़ते बिजली शुल्क और नगर निकायों के टैक्स से घरों तथा छोटे कारोबारों पर पडऩे वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए आगामी वर्ष की सुनवाई में और गंभीरता से उठाएंगे।

सुनवाई में बिजली निगमों ने स्वयं स्वीकार किया है कि नवंबर 2025 में मांगी गई 1,134.54 करोड़ रुपये की राशि में से लगभग 950.09 करोड़ रुपये (84 प्रतिशत) सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कारण उत्पन्न हुई देनदारी है। यह राशि वास्तव में पिछले वित्तीय वर्षों के ट्रांसमिशन शुल्क, विलंब भुगतान अधिभार और अतिरिक्त बिलों से संबंधित है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान में की जा रही वसूली वित्तीय वर्ष 2022-23 से संबंधित है, जबकि नियमों के अनुसार ऐसी राशि अधिकतम दो वर्ष के भीतर वसूल की जानी चाहिए।

हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने बिजली निगम की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनकी लापरवाही का खमियाजा उपभोक्ता पर नहीं पड़ना चाहिए।

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