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अरावली के जंगल और सुनसान खेत बने थे व्हाइट कालर टेरर मॉड्यूल के लिए हथियारों की टेस्टिंग का अड्डा

White coller terror module: अरावली के जंगल और सुनसान खेतों को ‘ व्हाइट कालर टेरर मॉड्यूल ’ के लिए विस्फोटकों और हथियारों की टेस्टिंग का ठिकाना बनाया गया था। NIA की चार्जशीट में यह दावा किया गया है।

चार्जशीट के मुताबिक, अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों ने यहां IED और अन्य विस्फोटकों के परीक्षण किए थे। एजेंसी का आरोप है कि यह मॉड्यूल 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट की साजिश का हिस्सा था, जिसमें 15 लोगों की मौत और 29 लोग घायल हुए थे।

अरावली के जंगलों में विस्फोटकों के परीक्षण

चार्जशीट के अनुसार, डॉ. उमर उन नबी, डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई और डॉ. अदील अहमद राथर ने कथित तौर पर फरीदाबाद के खेतों और अरावली के जंगलों में विस्फोटकों के परीक्षण किए। शुरुआत में फर्टिलाइजर आधारित मिश्रणों के साथ प्रयोग किए गए, जिसके बाद कथित तौर पर TATP जैसे अत्यधिक संवेदनशील विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। NIA के मुताबिक, अल-फलाह कैंपस के पास एक ट्यूबवेल के नजदीक भी विस्फोटक का परीक्षण किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद धौज के जंगलों में टेस्ट ब्लास्ट किए गए। एक परीक्षण में इस्तेमाल पाइप जैसे उपकरण के अवशेष भी गनाई की निशानदेही पर बरामद किए जाने की बात चार्जशीट में कही गई है।

अरावली के जंगल और सुनसान खेत बने थे व्हाइट कालर टेरर मॉड्यूल के लिए हथियारों की टेस्टिंग का अड्डा

हथियार खरीदने के लिए 16 लाख रुपये की व्यवस्था

जांच में हथियारों की टेस्टिंग का भी जिक्र है। NIA के मुताबिक, मॉड्यूल से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर हथियार खरीदने के लिए करीब 16 लाख रुपये की व्यवस्था की। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल क्रिंकोव राइफल, AK-47 और दो पिस्तौल खरीदने में किया गया। इसके बाद धौज के जंगल में क्रिंकोव का टेस्ट-फायर भी किए जाने का दावा है। चार्जशीट के अनुसार, मॉड्यूल ने विस्फोटक और अन्य सामान जुटाने के लिए गुरुग्राम और फरीदाबाद के बाजारों का इस्तेमाल किया। खाद, केमिकल, बिजली के उपकरण, ट्रॉली बैग, गैस स्टोव और अन्य सामान पहले अल-फलाह कैंपस के फ्लैटों में रखा गया और बाद में धौज के पास किराए की जगहों पर शिफ्ट किया गया।

जासिर बिलाल वानी ने की मॉड्यूल की मदद

NIA ने काजीगुंड निवासी जासिर बिलाल वानी पर भी मॉड्यूल की मदद करने का आरोप लगाया है। एजेंसी के मुताबिक, वानी ने विस्फोटक तैयार करने में तकनीकी सहायता दी और कच्चा माल किराए की जगहों तक पहुंचाया। चार्जशीट में उसके द्वारा रॉकेट-टाइप IED बनाए जाने का भी दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, 2025 की शुरुआत तक मॉड्यूल ने कथित तौर पर कई ‘सूटकेस-टाइप IED’ तैयार कर लिए थे। कुछ सामग्री धौज में किराए की जगह पर रखी गई थी। 9 नवंबर को फतेहपुर टागा से करीब 2,600 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था।

पठानकोट में मिला था ज्यादा वेतन वाली नौकरी का प्रस्ताव

NIA का कहना है कि उमर उन नबी को पठानकोट में ज्यादा वेतन वाली नौकरी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उसने अल-फलाह में रहना जारी रखा। चार्जशीट के मुताबिक, कैंपस में केमिकल, खाद, बिजली के उपकरण, वाहन और कथित सहयोगी आसानी से उपलब्ध थे। एजेंसी का आरोप है कि इसी वजह से वहां कथित साजिश का नेटवर्क विकसित हो सका।

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