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भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद के बीच BJP विधायक मैथिली ठाकुर ने तोड़ी चुप्पी

बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इस बीच बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में न केवल अपने नाम से फैलाए जा रहे कथित फर्जी बयानों का खंडन किया, बल्कि कानून और न्याय को लेकर अपनी स्पष्ट राय भी सामने रखी।

फर्जी बयानों पर जताई नाराजगी

सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मैथिली ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनके नाम से झूठे और भ्रामक बयान फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक विरोधी और महागठबंधन से जुड़े लोग फर्जी पोस्टर और मनगढ़ंत बयान प्रसारित कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी बयान को तभी सही माना जाए, जब वह उनके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो या ऑडियो के रूप में उपलब्ध हो।

भरत तिवारी मामले पर स्पष्ट रुख

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर मैथिली ठाकुर ने कहा कि भारत में कानून सर्वोपरि है और किसी को भी कानून से ऊपर जाकर कार्य करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया हो, तो उसके साथ पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत व्यवहार किया जाना चाहिए।

भरत तिवारी एनकाउंटर विवाद के बीच BJP विधायक मैथिली ठाकुर ने तोड़ी चुप्पी

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब एनकाउंटर को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।

कानून से ऊपर कोई नहीं

बीजेपी विधायक ने कहा कि यदि कोई पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति अपने अधिकारों का दुरुपयोग करता है और कानून को हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास जताते हुए कहा कि जवाबदेही तय होना लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ी बहस

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर राज्य की राजनीति में लगातार बयानबाजी हो रही है। विपक्ष जहां सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष निष्पक्ष जांच की बात कर रहा है। ऐसे माहौल में मैथिली ठाकुर का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। मैथिली ठाकुर ने अपने बयान के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि न्याय, पारदर्शिता और कानून का शासन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। अब सबकी नजर जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी है।

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