चौधरी देवीलाल: कोई यूं ही ताऊ नहीं बन जाता, आम लोगों से जुड़ी उनकी ये कहानियां आज भी याद

Chowdhury Devi Lal : चौधरी देवीलाल आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में विधायक बने और देश के उपप्रधानमंत्री तक पहुंचे। हरियाणा के निर्माण से लेकर हरियाणा के विकास और आम जनमानस के जीवन पर आज भी उनकी गहरी छाप है।
1985 में उन्होंने हरियाणा के बूढ़ों (बुजुर्गों) को बुढ़ापा पेंशन देने का जब वायदा किया तो उनके विरोधी नेता कहते थे कि यह कानूनन संभव ही नहीं है। 1987 में जब देवीलाल की सरकार बनी तो उन्होंने पहली कलम से इस वायदे को पूरा किया। उसके बाद सरकारें आती रही और बदलती भी रही, लेकिन बुढ़ापा पेंशन लगातार न केवल जारी है, बल्कि अब इसे बढ़ाने को चुनावी मुद्दा बनाया जाता है।
कहां से आया बुढ़ापा पेंशन का विचार
एक बार झज्जर जिले के एक गांव में ताऊ देवीलाल अपने पुराने साथी स्वतंत्रता सेनानी के घर चले गए। उनकी पोती ससुराल में जाने के लिए आशीर्वाद लेने पहुंची। उन्होंने पोती को शगुन देने के लिए बच्चों से रुपये मांगे और कुछ लोगों के लिए चाय बनवाने की बात कही। लेकिन काफी देर तक न तो बच्चों ने रुपये दिए और न ही चाय आई। यह ताऊ देवीलाल देख रहे थे, वे वादा करके गए, जिस दिन कलम में ताकत आएगी तो बुढ़ापा पेंशन लागू करेंगे। सत्ता आने के बाद उन्होंने वादा पूरा भी किया।

नोट छापने की मशीन
एक किस्सा बहुत मशहूर है कि चौधरी देवीलाल जहां भी जाते थे कह देते थे कि नोट छापने की मशीन का मुंह गांव में कर दूंगा। विपक्ष के लोग इस बात का उस समय मजाक बनाते थे, लेकिन यह ताऊ की अपनी सादगी और दूरदर्शी सोच थी। यह किस्सा कैसे चला? असल में एक बार चुनाव प्रचार के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि खेतों में नुकसान बहुत ज्यादा हो गया। ताऊ बोले, कोई दिक्कत नहीं है, सत्ता हाथ में आ गई तो नोट छापने की मशीन का मुंह गांवों की तरफ कर दूंगा, फिर रुपये-पैसे की कमी नहीं होगी। उनका मतलब उचित मुआवजे और ग्रामीण विकास से था।
कोई ताऊ ही रख सकता है इतना ध्यान
1965 से देवीलाल की सेवा में लगे झज्जर के बागपुर निवासी रणधीर सिंह लंबे समय तक वह ताऊ के साथ रहे। उनकी बीड़ी पीने की आदत थी और रुपये-पैसे होते नहीं थे। इसका पता ताऊ को भी था। जब वे (रणधीर सिंह) रात को सो जाते और सुबह उठते तो कमीज की जेब में कुछ रुपये मिलते थे। रुपये मिलने से हैरान हो जाते थे। एक बार उन्होंने ताऊ से पूछा कि कमीज में रुपये क्यों डाल देते हो? तो उन्होंने कहा कि मैं नहीं डालता और क्यों चिंता करता है। तेरी जेब में है तो खर्च भी तू ही कर लिया कर।
जब ताऊ को ढूंढते रह गए सुरक्षा कर्मी
यह घटना ताऊ देवीलाल के मुख्यमंत्री पद पर रहते के दौरान की है। रोहतक में ताऊ देवीलाल का रात्रि ठहराव था। सुबह वे बिना किसी को बताए पुराना बस स्टैंड के समीप स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्रीराम शर्मा के घर चले गए। पंडितजी का बेटा काफी बीमार था। सुरक्षा कर्मियों को जब ताऊ नहीं मिले तो वे तुरंत हरकत में आए और उनको ढूंढने लग गए। फिर उन्हें पता चला कि ताऊ शर्मा जी के यहां गए हैं। इस दौरान ताऊ ने पंडित जी के घर पर ही उनके बेटे को एक बोर्ड का चेयरमैन बनाने का आदेश दिया।
