
Srinagar News(India 365 news): जम्मू कश्मीर में ED की श्रीनगर में छापेमारी से हलचल मच गई है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कथित तौर पर लश्कर ए तैयबा से जुड़े उमर आदिल डार और उसके करीबियों के चार ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया है। जांच एजेंसी को शक है कि इन ठिकानों के जरिए आतंकी फंडिंग से जुड़े पैसों का लेनदेन किया जा रहा था। अब ED इस पूरे नेटवर्क और इसके पीछे काम कर रहे लोगों का पता लगाने में जुटी है।
जानकारी के मुताबिक उमर आदिल डार पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के ओवर ग्राउंड वर्कर यानी OGW के तौर पर काम करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि उसे पहले भी बड़ी मात्रा में नकदी और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के साथ पकड़ा गया था। हालांकि इस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।
उमर आदिल डार अलगाववादी और भारत विरोधी गतिविधियों के आरोप में करीब चार साल जेल में भी रह चुका है। अब ED की जांच का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि आतंकी गतिविधियों के लिए पैसा कहां से आ रहा था और किन रास्तों से इसे आगे पहुंचाया जा रहा था।
जांच एजेंसी चार ठिकानों पर तलाशी के दौरान पैसों के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और दूसरे जरूरी सबूत जुटाने में लगी है। इसके साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उमर आदिल डार का सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स से कोई संपर्क था या नहीं। जांच में पाकिस्तान से जुड़े संभावित कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है।
ED यह पता करना चाहती है कि कथित आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला पैसा किन लोगों के जरिए आता था और इसे किन कामों में लगाया जाता था। इसके लिए मनी ट्रेल की जांच की जा रही है ताकि पैसों के पूरे रास्ते का पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी बनी हुई है। ऐसे माहौल में जम्मू कश्मीर में आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम बनी हुई है।
फिलहाल ED की इस कार्रवाई में क्या कुछ सबूत मिले हैं और जांच में आगे किन लोगों के नाम सामने आते हैं इसकी जानकारी का इंतजार है।
