चंबा में लैंडस्लाइड का कहर, घर पर गिरा सौ क्विंटल से ज्यादा वजनी पत्थर

भारी बारिश की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश के चंबा में अब भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आधी रात को पहाड़ी से टूटकर आया विशाल पत्थर एक मकान पर गिर पड़ा। परिवार की जान तो बच गई, लेकिन घर और आसपास का इलाका बुरी तरह तबाह हो गया।
आधी रात में टूटी पहाड़ी, चकनाचूर हुआ मकान
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मंगलवार देर रात करीब 12 से 12:30 बजे के बीच सरोल गांव की अपर घोलटी में बड़ा लैंडस्लाइड हुआ। पहाड़ी से टूटकर आया सौ क्विंटल से अधिक वजनी विशाल पत्थर सीधे परविंदर कुमार के पक्के मकान की छत पर गिरा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मकान का लेंटर पूरी तरह टूट गया और घर के भीतर रखा सामान भी मलबे में दबकर नष्ट हो गया।
कुछ फीट की दूरी ने बचा ली परिवार की जान
विशाल पत्थर रास्ते में पेड़ों, खेतों और खलिहानों को रौंदता हुआ घर तक पहुंचा। राहत की बात यह रही कि वह मकान के अगले कमरों तक नहीं पहुंचा। यदि पत्थर कुछ फीट और आगे बढ़ जाता, तो बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने मौजूद प्राकृतिक जोखिम को उजागर कर दिया है।

प्रशासन ने दी तत्काल राहत
घटना की जानकारी मिलते ही जिला परिषद उपाध्यक्ष लियाकत अली मौके पर पहुंचे। उनके निर्देश पर प्रशासन ने पीड़ित परिवार को तत्काल ₹25 हजार की राहत राशि उपलब्ध कराई। साथ ही बताया गया कि प्रदेश सरकार की नीति के तहत पात्रता के आधार पर सात लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जा सकता है। प्रशासन ने राहत किट और अन्य जरूरी सहायता भी जल्द उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया है।
25 से ज्यादा घर प्रभावित, सड़कें और वाहन मलबे में दबे
लगातार हो रही बारिश के कारण चंबा में कई जगह भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। सुल्तानपुर इलाके में 25 से अधिक घरों और एक दुकान को नुकसान पहुंचा है, जबकि भरियाड के पास भूस्खलन में कार, ट्रक और दोपहिया वाहनों समेत एक दर्जन से ज्यादा वाहन मलबे में दब गए। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
पूरे हिमाचल में मानसून का असर
राज्य आपात अभियान केंद्र के अनुसार, प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ के कारण 178 सड़कें बंद हैं। जलापूर्ति योजनाएं और बिजली ट्रांसफॉर्मर भी प्रभावित हुए हैं, जिससे कई इलाकों में आवश्यक सेवाएं बाधित हैं। शिमला में भी जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। 30 जून से शुरू हुए मानसून के बाद अब तक राज्य में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाओं में 15 लोगों की जान जा चुकी है।
चंबा की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पहाड़ी राज्यों में लगातार बढ़ते प्राकृतिक खतरों की गंभीर चेतावनी भी है। बदलते मौसम, लगातार हो रही भारी बारिश और कमजोर होती पहाड़ियों के बीच समय रहते प्रभावी आपदा प्रबंधन, सुरक्षित निर्माण और त्वरित राहत व्यवस्था ही भविष्य में ऐसे हादसों से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है।
