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यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव, NDA और सपा के बीच वोटों का पूरा गणित समझिए

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव का कार्यक्रम सामने आने के साथ ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। 16 अक्टूबर को मतदान होगा और चुनाव प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो रही है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों में NDA के पास बड़ा संख्याबल है, जबकि समाजवादी पार्टी अपने सहयोगियों के साथ तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकती है।

16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। इसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगी।

इन 10 सीटों में आठ फिलहाल BJP के पास हैं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और BSP के पास है। BSP की विधानसभा में कोई सीट नहीं है, इसलिए इस चुनाव में उसकी स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

397 विधायकों के बीच होगा फैसला

उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रभावी संख्या फिलहाल 397 है, क्योंकि छह सीटें खाली हैं। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को निर्वाचित होने के लिए 37 प्रथम वरीयता वाले वोट चाहिए।

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार BJP के 256 विधायक हैं। उसके सहयोगी दलों के साथ NDA के पास 289 विधायक हैं। दो जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) विधायकों और कुछ निर्दलीय समर्थन को जोड़ने पर यह संख्या 294 तक पहुंच सकती है।

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NDA के लिए आठवीं सीट पर गणित

294 विधायकों के संभावित समर्थन के आधार पर NDA सात सीटों के लिए जरूरी 259 वोट आसानी से जुटा सकता है। सात सीटों के बाद उसके पास अतिरिक्त वोट बचेंगे। आठवीं सीट के लिए 37 वोट की जरूरत होगी, इसलिए अतिरिक्त समर्थन और सहयोगी विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

यही वजह है कि चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों के रुख पर भी नजर रहेगी।

सपा-कांग्रेस के पास दो सीटों का आधार

समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के दो विधायक हैं। दोनों को मिलाकर संख्या 103 होती है। यह आंकड़ा दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट से अधिक है।

तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी छोटे सहयोगी दलों और कुछ अन्य विधायकों से समर्थन की संभावनाएं तलाश सकती है। ऐसे में तीसरी सीट का मुकाबला अतिरिक्त वोटों और क्रॉस-वोटिंग की स्थिति पर निर्भर कर सकता है।

उम्मीदवारों के नाम पर भी नजर

चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद अब BJP और सपा समेत सभी दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर गतिविधियां बढ़ गई हैं। मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका मिलेगा या नए चेहरों को मैदान में उतारा जाएगा, इस पर भी चर्चा है।

समाजवादी पार्टी के सामने अपने मौजूदा दो सीटों के समीकरण को बनाए रखने के साथ तीसरे उम्मीदवार के लिए समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। वहीं NDA के लिए अतिरिक्त वोटों का प्रबंधन अहम रहेगा।

2027 से पहले अहम चुनाव

राज्यसभा चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। इसलिए राजनीतिक दल इस चुनाव को अपने संगठनात्मक प्रबंधन और गठबंधन की स्थिति को परखने के अवसर के तौर पर भी देख रहे हैं।

हालांकि, मौजूदा विधानसभा आंकड़ों से संभावित सीटों का गणित जरूर सामने आता है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या, नामांकन के बाद की स्थिति, समर्थन और क्रॉस-वोटिंग जैसे कारक अंतिम नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का चुनाव अब सिर्फ संख्या का खेल नहीं रह गया है। 37 वोट का कोटा, 397 विधायकों की प्रभावी संख्या और दोनों खेमों के अतिरिक्त वोटों का गणित मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है। 16 अक्टूबर के मतदान तक उम्मीदवारों और समर्थन के समीकरणों में बदलाव पर सभी की नजर रहेगी।

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