गुरुग्राम में खाद्य प्रसंस्करण, धातु और कपड़ा उद्योगों के आधे से ज्यादा उद्योगों पर संकट के बादल

Crisis for more than half industries: गुरुग्राम में 50 फीसदी से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों पर संचालन बंदी का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल, गुरुग्राम में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए औद्योगिक इकाइयों में रियल-टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली और एपीसीडी उपकरण लगाना अनिवार्य है। लेकिन करीब 65 प्रतिशत उद्योग अभी तक इन्हें लगाने में विफल रहे हैं। इससे उनका लाइव उत्सर्जन डेटा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से नहीं जुड़ पाया है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन उद्योगों को 30 सितंबर तक का अंतिम मौका दिया है। यदि फिर भी इन्होंने उपकरण नहीं लगाए गए तो इनके संचालन की अनुमति रद्द की जा सकती है।
65 फीसदी उद्योग यंत्र लगाने में विफल
प्रदूषण रोकने में करीब 65 प्रतिशत उद्योग उपकरण लगाने में विफल रहे हैं। जिले में 157 औद्योगिक इकाइयों के उत्सर्जन रिकॉर्ड प्रदर्शित किए गए थे। इसमें 35 प्रतिशत उद्योगों ने उपकरण लगाए हैं, बाकी ने समय मांगा था।
रद्द की जा सकती है संचालन की मंजूरी
इन इकाइयों पर संचालन के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इनको 30 सितंबर तक रियल-टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने के लिए समय मिला है। नियमों का पालन नहीं करने पर उद्योगों की संचालन मंजूरी रद्द की जा सकती है।
जारी किए गए थे आदेश
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को निर्देश दिया था कि जिले में 157 इकाइयों में खाद्य प्रसंस्करण, धातु और कपड़ा उद्योगों में रियल-टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाए। इससे निलंबित कण पदार्थ (एसपीएम), सल्फर ऑक्साइड (एसओएक्स) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) को मापने के लिए एपीसीडी लगाने का काम पूरा कर लें।

65 प्रतिशत उद्योग मॉनिटरिंग सिस्टम से नहीं जुड़े
एचएसपीसीबी अधिकारियों के अनुसार कादीपुर, मानेसर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में खाद्य प्रसंस्करण, धातु और कपड़ा उद्योगों में कड़ी निगरानी की जरूरत वाली चार कैटेगरी में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली है। इसमें से लगभग 65 प्रतिशत उद्योग ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) से नहीं जुड़ पाईं है।
30 सितंबर तक बढ़ाई गई डेडलाइन
उद्योगों का लाइव उत्सर्जन डेटा को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सीपीसीबी/एसपीसीबी सर्वर पर अपने-आप सिंक और ट्रांसमिट नहीं करता है। इसलिए रियल-टाइम उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने की डेडलाइन 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है, लेकिन 65 प्रतिशत औद्योगिक इकाईयां अभी तक नहीं लगाई है। दो दिन का समय अभी बचा हुआ है। इन उद्योगों में ऑनलाइन निगरानी यंत्र लगाना अनिवार्य किया गया है।
बदलने जा रहा है नियम, किन्हें मिलेगी राहत
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी मुकुल कथूरिया ने कहा कि जिन उद्योगों ने ऑनलाइन निगरानी यंत्र नहीं लगाया है, उन उद्योगों को लगाने के लिए दो दिन का समय बचा है। नियमों का पालन नहीं करने वाले उद्योग संचालकों पर जुर्माना लगाया जाएगा। उद्योग संचालन अनुमति रोक दी जाएगी।
