
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर केंद्र सरकार की E20 और एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए साइकिल को E20 से “आजाद” बताया। वहीं, राज्यसभा में उठे इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए E20 के उपयोग को सुरक्षित बताया।
अखिलेश यादव का तंज
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “साइकिल की रफ्तार जोरदार है क्योंकि साइकिल E20 से आजाद है।” यह उनकी पार्टी के चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ के संदर्भ में किया गया राजनीतिक व्यंग्य था। इससे पहले भी वह एथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए इसे मुनाफाखोरी से जोड़ चुके हैं।
एथेनॉल को लेकर क्या हैं सवाल?
अखिलेश यादव का कहना है कि सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लाभों का प्रचार तो कर रही है, लेकिन माइलेज में कमी और वाहनों के इंजन पर संभावित प्रभाव जैसे सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। ये उनके राजनीतिक और सार्वजनिक दावे हैं।

राज्यसभा में भी उठा मुद्दा
बुधवार को राज्यसभा में भी E20 ईंधन का मुद्दा उठा। सीपीआई(एम) के सदस्यों ने केंद्र सरकार से पूछा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का पुराने और नए वाहनों पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा इसके संबंध में सरकार के पास क्या अध्ययन उपलब्ध हैं।
गडकरी ने रखा सरकार का पक्ष
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जवाब देते हुए कहा कि E20 ईंधन को लागू करने से पहले व्यापक परामर्श और परीक्षण किए गए हैं। उनके अनुसार, अनुसंधान में पाया गया कि BS-VI मानक वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों में E20 के उपयोग से उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप रहा और इंजन में किसी बड़े तकनीकी बदलाव या असामान्य घिसाव की आवश्यकता या समस्या सामने नहीं आई। यह सरकार का पक्ष है।
पुरानी गाड़ियों को लेकर बनी हुई है चर्चा
देशभर में E20 और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर चर्चा जारी है। विशेष रूप से पुराने वाहनों के मालिकों के बीच माइलेज और इंजन पर संभावित असर को लेकर विभिन्न दावे और आशंकाएं सामने आ रही हैं। इन दावों पर अलग-अलग विशेषज्ञों और वाहन निर्माताओं की राय अलग हो सकती है। वाहन मालिकों के लिए अपने वाहन निर्माता की अनुशंसाओं का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
E20 और एथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर बहस जारी है। जहां विपक्ष सरकार से अधिक स्पष्टता और जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार परीक्षणों और शोध के आधार पर इस नीति को सुरक्षित और पर्यावरण के लिए लाभकारी बता रही है। आने वाले समय में इस विषय पर और चर्चा होने की संभावना है।
