
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राबड़ी देवी बंगला विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष और खासकर लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को सरकारी आवास छोड़ने में परेशानी होती है और उनकी सबसे बड़ी चिंता अपना घर बचाए रखने की होती है। सम्राट चौधरी ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि किसी को बेटे के लिए अलग घर चाहिए तो किसी को माता जी के लिए अलग आवास चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनता दल और लालू परिवार पर राजनीतिक निशाने के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना बढ़ गई है।
नीतीश कुमार का उदाहरण देकर विपक्ष को घेरा
सम्राट चौधरी ने अपने बयान में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री बने थे और इसके बाद एक मई को नीतीश कुमार ने सरकारी आवास खाली कर दूसरे घर में जाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने नीतीश कुमार का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद भी किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता उन नेताओं को पसंद करती है जो खुद को शासक नहीं बल्कि सेवक मानते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश करने के बाद उन्होंने निर्देश दिया था कि इसे मुख्यमंत्री का नहीं बल्कि लोकसेवक का आवास माना जाए। उनका कहना था कि सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं होती और लोकतंत्र में किसी को भी स्थायी अधिकार नहीं मिल सकता। इस बयान के जरिए उन्होंने राजनीतिक शुचिता और जवाबदेही का संदेश देने की कोशिश की।

सरकारी घर नहीं, जनता की सेवा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। मंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री तक की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद उन्होंने कभी सरकारी आवास को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक वह अपने निजी घर में ही रहे और सरकारी सुविधाओं के मोह से दूर रहे। सम्राट चौधरी ने कहा कि जनता की सेवा के लिए राजनीति में आए व्यक्ति का ध्यान जनहित पर होना चाहिए न कि सरकारी सुविधाओं पर। उन्होंने दोहराया कि सरकारी आवास केवल प्रशासनिक कार्यों के संचालन का माध्यम है और इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में पद अस्थायी होते हैं लेकिन जनता के प्रति जिम्मेदारी स्थायी होती है।
24 घंटे में आवास छोड़ने का दावा और सियासी संदेश
अपने संबोधन के दौरान सम्राट चौधरी ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस दिन उनकी पार्टी और नेतृत्व यह तय कर देगा कि उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई है, वह 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास छोड़कर अपने निजी घर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ नहीं बल्कि समाज और जनता की सेवा है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और विभिन्न दल आगामी चुनावी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे के जरिए खुद को एक सादगीपूर्ण और जनसेवा केंद्रित नेता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। वहीं विपक्ष इस बयान को राजनीतिक हमला मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
