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अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, चुनावी हिंसा भड़काने के आरोप की जांच अब CID करेगी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Abhishek Banerjee के खिलाफ चुनावी हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को कथित रूप से धमकी देने से जुड़े मामले की जांच अब राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दी गई है। इससे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

जानकारी के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक कथित विवादित भाषण से जुड़ा है। इस संबंध में पिछले महीने बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब तक मामले की जांच स्थानीय साइबर क्राइम पुलिस कर रही थी, लेकिन राज्य पुलिस ने इसे CID को ट्रांसफर कर दिया है।

बताया जा रहा है कि CID पहले से ही विधानसभा में विपक्ष से जुड़े कुछ पदों पर नियुक्तियों के प्रस्ताव में कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़े के मामले में भी अभिषेक बनर्जी को तीन बार पूछताछ के लिए समन भेज चुकी है। ऐसे में यह नया मामला उनके लिए अतिरिक्त कानूनी चुनौती बन सकता है।

इस बीच अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए Calcutta High Court का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 21 मई को अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनावी माहौल में दिए गए कथित भड़काऊ बयानों पर गंभीर टिप्पणी की थी।

न्यायमूर्ति ने यह सवाल भी उठाया था कि एक राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता और तीन बार के सांसद द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी करना कितना उचित है, खासकर ऐसे राज्य में जहां चुनाव के बाद हिंसा का इतिहास रहा है। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि चुनाव परिणाम अलग होते, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

हालांकि, अदालत ने अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत देते हुए 31 जुलाई तक गिरफ्तारी या किसी अन्य दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया है। साथ ही यह शर्त भी लगाई गई है कि वे अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे।

अब CID की जांच के बाद इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।

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