पटना रिंग रोड को मिली बड़ी मंजूरी, 150 KM परियोजना से दिल्ली-NCR जैसी कनेक्टिविटी; छपरा-सीवान का सफर होगा आसान

बिहार की राजधानी Patna के विकास को नई रफ्तार देने वाली महत्वाकांक्षी पटना रिंग रोड परियोजना को बड़ी मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने परियोजना के आठवें और अंतिम हिस्से के एलाइनमेंट को हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही करीब 16 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली 150 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
यह परियोजना पटना को दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर विकसित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। रिंग रोड बनने के बाद राजधानी और आसपास के जिलों में ट्रैफिक दबाव कम होगा, साथ ही तेज और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
परियोजना का अंतिम चरण Dighwara से शुरू होकर Sarai तक बनाया जाएगा। लगभग 30 किलोमीटर लंबा यह हिस्सा सारण और वैशाली जिलों को जोड़ते हुए गंगा के उत्तर क्षेत्र में विकसित होगा। सड़क दिघवारा, दरियापुर और दरिहारा से होकर गुजरेगी तथा गंडक नदी पार कर वैशाली के विभिन्न इलाकों को जोड़ेगी।
गौरतलब है कि पटना रिंग रोड की परिकल्पना वर्ष 2005 में की गई थी। करीब दो दशक बाद यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अब तक इसके दो हिस्सों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि एक खंड पर निर्माण कार्य जारी है। इस परियोजना को Patna-Purnia Expressway और आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा।
पटना रिंग रोड की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसके जरिए 7 राष्ट्रीय राजमार्ग और 5 राज्य राजमार्ग आपस में जुड़ जाएंगे। इससे बिहार में व्यापार, उद्योग, माल परिवहन और यातायात को बड़ा लाभ मिलेगा। खासकर छपरा, सीवान, वैशाली और पटना के बीच सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।
अंतिम चरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद निर्माण लागत और दूरी से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आएगी। भूमि अधिग्रहण पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा बिहार सरकार वहन करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद पटना महानगर क्षेत्र का तेजी से विस्तार होगा और राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
बुनियादी ढांचे के लिहाज से यह परियोजना बिहार के सबसे महत्वपूर्ण सड़क प्रोजेक्ट्स में से एक मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में राज्य की कनेक्टिविटी और निवेश संभावनाओं को मजबूत करेगी।
