
मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव 2026 ने एक नया इतिहास रच दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता महेश केवट राज्यसभा की तीसरी सीट पर निर्विरोध निर्वाचित होकर पिछले एक दशक से चले आ रहे राजनीतिक मिथक को तोड़ने में सफल रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में यह पहली बार हुआ है जब किसी नेता ने राज्यसभा की तीसरी सीट बिना किसी मुकाबले के हासिल की है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट हमेशा से सबसे चुनौतीपूर्ण मानी जाती रही है। इस सीट पर जीत के लिए अक्सर कड़े राजनीतिक समीकरण, क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक गठबंधन देखने को मिलते रहे हैं। यही कारण है कि भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता इस सीट की लड़ाई में सफलता हासिल नहीं कर पाए थे।
साल 2016 में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार विनोद गोटिया को तीसरी सीट के लिए मैदान में उतारा गया था। हालांकि, उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2020 में एक बार फिर तीसरी सीट को लेकर जबरदस्त राजनीतिक संघर्ष देखने को मिला। उस चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फूल सिंह बरैया उम्मीदवार थे, लेकिन वह बेहद करीबी मुकाबले में महज 16 वोटों से चुनाव हार गए थे। उस समय भाजपा के ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे थे।
वर्ष 2026 के चुनाव में भी तीसरी सीट को लेकर मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही थी। भाजपा ने महेश केवट को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा। लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया, जिससे पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया।
नामांकन रद्द होने के बाद तीसरी सीट पर मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई। नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने तक कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं रहा, जिसके चलते महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। इस तरह उन्होंने राज्यसभा की तीसरी सीट पर जीत दर्ज कर एक नया राजनीतिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
महेश केवट की जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने उन असफलताओं की श्रृंखला को तोड़ा है, जो पिछले दस वर्षों से इस सीट के साथ जुड़ी हुई थीं। उनकी जीत न केवल भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता है, बल्कि मध्यप्रदेश की राज्यसभा राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व के समीकरणों पर भी प्रभाव डाल सकता है। महेश केवट अब उच्च सदन में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे और उनकी जीत को भाजपा की रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
