
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्वालियर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज मानहानि के एक प्रकरण से जुड़ा है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी देवाशीष जरारिया ने आरोप लगाया था कि चुनाव प्रचार के दौरान जीतू पटवारी ने सार्वजनिक मंच से उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कथित संबंध होने का आरोप लगाया था, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
कोर्ट में पेश नहीं होने पर कार्रवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जीतू पटवारी को 16 जनवरी 2026 को पेश होने का नोटिस जारी किया था। निर्धारित तिथि पर उनके अदालत में उपस्थित नहीं होने के बाद कोर्ट ने जमानती वारंट जारी कर दिया। साथ ही अदालत ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि जब नेता सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया में लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो उनकी गिरफ्तारी या पेशी सुनिश्चित क्यों नहीं की जा सकी।

भिंड एसपी को दिए निर्देश
अदालत ने भिंड के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले हर हाल में जीतू पटवारी की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने पुलिस से इस संबंध में जवाब भी मांगा है और कार्रवाई में देरी पर असंतोष व्यक्त किया है।
2024 के चुनावी बयान से जुड़ा है मामला
यह मामला 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता देवाशीष जरारिया ने आरोप लगाया था कि चुनावी सभा के दौरान जीतू पटवारी ने कहा था कि वह भाजपा से “माल लेकर आए हैं”। बसपा नेता ने इस बयान का वीडियो भी पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपा था। इसी आधार पर मानहानि का मामला दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई अब अदालत में जारी है।
