
समाज कल्याण विभाग ने आउटसोर्स और अंशकालिक श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकाश, इंश्योरेंस और पीएफ जैसी सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही हर कर्मचारी को मासिक वेतन पर्ची और 15 दिनों के भीतर पहचान पत्र जारी करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम श्रमिकों की पारदर्शिता और अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
श्रम संवाद 2026 में नई श्रम नीतियों की विस्तृत जानकारी
भागीदारी प्रेक्षागृह में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर ‘श्रम संवाद 2026’ कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि नए लेबर कोड्स और आउटसोर्स सेवा निगम के गठन से श्रमिकों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी गई है। उन्होंने बताया कि अब काम के घंटे, छुट्टियां और वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और अनिवार्य होगी। कार्यक्रम में श्रम विभाग के अधिकारियों ने भी नई नीतियों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है।

नए नियमों से कार्य संस्कृति में बड़ा बदलाव
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी आउटसोर्स या अनुबंध कर्मचारी से लगातार सात दिन तक काम लेना अवैध होगा। छह दिन काम के बाद एक दिन का सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य कर दिया गया है। कार्य समय को आठ से नौ घंटे के बीच निर्धारित किया गया है और अतिरिक्त कार्य के लिए ओवरटाइम भुगतान जरूरी होगा। इसके अलावा कर्मचारियों को साल में दस आकस्मिक अवकाश, छह महीने की सेवा के बाद पंद्रह दिन का चिकित्सीय अवकाश और पंद्रह दिन का अर्जित अवकाश दिया जाएगा, जिसे अगले वर्ष कैरी फॉरवर्ड भी किया जा सकेगा।
आउटसोर्स सेवा निगम से बिचौलियों की भूमिका खत्म
सरकार ने एक अप्रैल से आउटसोर्स सेवा निगम लागू कर दिया है जिसका उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके जरिए श्रमिकों को सीधे लाभ पहुंचाया जाएगा और उनके शोषण पर रोक लगेगी। अकुशल श्रमिकों के लिए 11000 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 13500 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। इस पहल से न केवल श्रमिकों की आय में सुधार होगा बल्कि रोजगार व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी बनेगी। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
