राजनीतिराज्य

हरियाणा चुनाव परिणाम में निर्दलीयों का जलवा, कई जगहों पर उलटफेर

हरियाणा में हुए सात शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 निकायों में जीत दर्ज की है। इन चुनावों में कई जगहों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन अधिकांश सीटों पर बीजेपी ने बढ़त बनाते हुए अपना दबदबा कायम रखा। अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवाड़ी, धारूहेड़ा और सांपला जैसे प्रमुख क्षेत्रों में पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया है, जबकि उकलाना नगर पालिका में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है।

अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में बीजेपी का दबदबा कायम

अंबाला नगर निगम में बीजेपी की अक्षिता सैनी ने मेयर पद पर जीत दर्ज की और पार्टी ने 20 में से 16 वार्डों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को केवल 3 सीटें मिलीं जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। सोनीपत में भी बीजेपी के राजीव जैन ने मेयर पद पर जीत हासिल की और 22 में से 17 वार्डों में पार्टी उम्मीदवार विजयी रहे। वहीं पंचकूला नगर निगम में बीजेपी के श्याम लाल बंसल ने मेयर पद पर जीत दर्ज की, जहां पार्टी ने 20 में से 17 वार्ड जीतकर अपनी मजबूत स्थिति साबित की। इन तीनों प्रमुख नगर निगमों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।

हरियाणा चुनाव परिणाम में निर्दलीयों का जलवा, कई जगहों पर उलटफेर

कई नगर पालिकाओं में निर्दलीयों का प्रभाव, उकलाना में बड़ा उलटफेर

उकलाना नगर पालिका में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी रीमा सोनी ने चेयरपर्सन पद पर जीत दर्ज कर बीजेपी को बड़ा झटका दिया। यहां 16 वार्डों में अधिकांश निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की, जिससे यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से दिलचस्प बन गया। धारूहेड़ा नगर पालिका में भी सभी 18 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, क्योंकि चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े गए थे। रेवाड़ी नगर परिषद में बीजेपी ने 32 में से 11 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि 19 सीटें निर्दलीय और 2 कांग्रेस के खाते में गईं।

मुख्यमंत्री सैनी ने जताई संतुष्टि, विपक्ष पर साधा निशाना

हरियाणा निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता ने केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विपक्ष की नीतियों और राजनीति पर जनता का विश्वास कम हुआ है और लोग अब विकास आधारित राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों और योजनाओं की सफलता का परिणाम बताया।

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