
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati को कथित तौर पर सड़क किनारे बने एक अस्थायी शिविर में रात बितानी पड़ी। उनके सहयोगियों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले से तय रात्रि विश्राम स्थल के उपयोग की अनुमति नहीं दी। बताया गया कि शंकराचार्य अपनी ‘गौ विष्टि यात्रा’ के तहत कन्नौज पहुंचे थे और उनके ठहरने की व्यवस्था छिबरामऊ क्षेत्र के एक निजी विद्यालय में की गई थी। लेकिन अंतिम समय में अनुमति न मिलने की सूचना मिलने के बाद पूरी योजना बदलनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर चर्चाओं को जन्म दे दिया और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे।
अस्थायी टेंट बना रात का ठिकाना
आयोजकों के अनुसार जब विद्यालय में रुकने का कार्यक्रम रद्द हुआ तो शंकराचार्य ने पाल चौराहा स्थित स्वागत स्थल पर ही रात्रि विश्राम करने का निर्णय लिया। वहां जल्दबाजी में एक अस्थायी टेंट लगाया गया और उसी को रात भर के लिए ठिकाना बनाया गया। पूरी रात सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल तैनात रहा। सहयोगियों का कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद वहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। बिजली और पंखों की व्यवस्था न होने के कारण सेवकों ने हाथ के पंखों से हवा कर उन्हें राहत पहुंचाने का प्रयास किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और कई श्रद्धालु देर रात तक स्थल पर डटे रहे।

गौ विष्टि यात्रा के जरिए जनजागरण का अभियान
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों देशभर में ‘गौ विष्टि यात्रा’ निकाल रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य गाय को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग को मजबूत करना और गौ संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया जा रहा है। उनके अनुसार यह अभियान केवल धार्मिक भावना से जुड़ा नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी संबंधित है। यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में सभाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शंकराचार्य का दावा है कि अब तक वह लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं और लोगों से व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में कन्नौज भी उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
यात्रा जारी रखने का किया ऐलान
गुरुवार सुबह फर्रुखाबाद रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति के बावजूद उनकी यात्रा नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में गौ संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। सुबह करीब आठ बजे वह अपने समर्थकों और काफिले के साथ अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। हालांकि कन्नौज में हुई इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और धार्मिक यात्राओं के दौरान मिलने वाली सुविधाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
