
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कथित मानहानिकारक कंटेंट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी से जुड़े कथित AI-जनरेटेड वीडियो को फेसबुक और इंस्टाग्राम से हटाने का अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह 36 घंटे के भीतर संबंधित वीडियो अपने प्लेटफॉर्म से हटाए।
वीडियो में क्या दावा किया गया था?
याचिका के अनुसार, सोशल मीडिया पर साझा किए गए AI-जनरेटेड वीडियो में दावा किया गया था कि वर्ष 1985 में सलीम इकबाल शेरवानी ने अपनी फैक्ट्री में हुई हड़ताल समाप्त कराने के लिए गैंगस्टर अतीक अहमद की मदद ली थी। वीडियो में आगे यह भी कहा गया कि इसके बाद दोनों के बीच संबंध मजबूत हुए और शेरवानी ने अतीक अहमद को इलाहाबाद में अपना आपराधिक नेटवर्क फैलाने में मदद की। शेरवानी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा, निराधार और मनगढ़ंत बताया है।
कोर्ट ने मेटा और अन्य अकाउंट्स को दिए निर्देश
जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने सुनवाई के दौरान मेटा को वीडियो हटाने का आदेश दिया। साथ ही, ‘जन चौपाल पोस्ट’ और एक अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को भी अगली सुनवाई तक इन वीडियो को दोबारा पोस्ट या साझा करने से रोक दिया गया है। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि फिलहाल संबंधित सामग्री को प्लेटफॉर्म से हटाया जाना आवश्यक है।

लाखों लोगों तक पहुंचा था वीडियो
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दोनों वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखे जा चुके हैं और हजारों उपयोगकर्ताओं ने उन्हें लाइक व शेयर किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
पत्रकारिता के मानकों का भी उठाया मुद्दा
शेरवानी की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि खुद को पत्रकारिता मंच बताने वाले ‘जन चौपाल पोस्ट’ ने वीडियो प्रकाशित करने से पहले उनका पक्ष नहीं लिया। याचिका में इसे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पत्रकारिता मानकों के विपरीत बताते हुए आरोप लगाया गया कि AI तकनीक का उपयोग कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत का यह आदेश AI-जनरेटेड कंटेंट, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और ऑनलाइन मानहानि से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर अगला निर्णय करेगी।
