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विक्रमशिला सेतु में फिर खतरे की आहट! बढ़ता गैप बना चिंता का कारण

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु में एक बार फिर तकनीकी खामी के संकेत मिलने लगे हैं। बिजली पोल संख्या 121 और 122 के बीच स्थित एक्सपेंशन जॉइंट का गैप सामान्य 40 मिलीमीटर से बढ़कर करीब 90 मिलीमीटर तक पहुंच गया है। यह वही तरह की समस्या है, जिसने वर्ष 2022 में पुल के एक स्पैन को ध्वस्त कर दिया था।

क्यों बढ़ी लोगों की चिंता?

स्थानीय लोगों और यात्रियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछली बार भी शुरुआती चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया था। बाद में पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। अब एक बार फिर उसी तरह का गैप दिखाई देने से लोगों के मन में आशंका बढ़ गई है।

हजारों वाहनों की आवाजाही जारी

वर्तमान में प्रभावित हिस्से से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजर रहे हैं। ट्रक, बसें, निजी वाहन और मालवाहक गाड़ियां लगातार इस पुल का उपयोग कर रही हैं। ऐसे में किसी भी तकनीकी समस्या का असर सीधे आम लोगों की सुरक्षा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

अस्थायी इंतजामों पर उठ रहे सवाल

स्थिति को देखते हुए बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने एक्सपेंशन जॉइंट के ऊपर मोटी लोहे की चादर लगाकर अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था की है। विभाग का कहना है कि जल्द ही वहां रबर कवर लगाया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल तात्कालिक समाधान है और मूल समस्या का स्थायी इलाज नहीं।

तकनीकी जांच में क्या मिला?

निरीक्षण करने पहुंची तकनीकी टीम ने प्रारंभिक जांच में लगभग 90 एमएम गैप की पुष्टि की है। इंजीनियरों का कहना है कि तकनीकी मानकों के अनुसार यह स्थिति सामान्य नहीं है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पटना मुख्यालय को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

अधिकारियों ने दिए सतर्कता के संकेत

पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय भारती ने कहा है कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि तस्वीरों में दिखाई दे रही स्थिति सावधानी बरतने की मांग करती है।

विक्रमशिला सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि बिहार के लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में बढ़ते गैप को महज तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2022 की घटना से सबक लेते हुए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

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